
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : ‘राष्ट्र सेवा’ को मंत्र मानकर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी अद्वितीय नेतृत्व क्षमता, अटूट संकल्प और दूरदर्शी सोच द्वारा भारत को नई ऊंचाई दी है ! तमिलनाडु के नीले समंदर पर निर्मित नया पांंबन ब्रिज भी रेलवे विस्तार और इंजीनियरिंग कौशल की तस्वीर है। यह भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट रेलवे सी ब्रिज है।
परिवहन के नए युग की ओर
2019 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में इस नए ब्रिज के निर्माण की आधारशिला रखी गई और मात्र 4 साल में समुद्र पर इस अद्भुत निर्माण को पूरा कर लिया गया।

पांबन ब्रिज की विशेषताएँ
2.08 किलोमीटर का ये भव्य संरचना पुराने पांबन ब्रिज से से 3 मीटर अधिक ऊँचा है, ताकि छोटे जहाज सुगमता के साथ इसके नीचे से होकर गुजर सकें। इस पूरे ब्रिज को बनाने में 18.3 मीटर के 99 स्पैन का प्रयोग किया गया है साथ ही ब्रिज के मध्य में 72.5 मीटर का एक वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जिसे जरूरत पड़ने पर बड़े जहाजों के लिए 17 मीटर तक ऊपर उठाया जा सकता है।
इस ब्रिज में 333 पाइल्स और 101 पाइल कैप्स का इस्तेमाल कर इसकी सतह को 58 वर्षों तक सुरक्षित रखने के लिए उत्कृष्ट सुरक्षा प्रणाली अपनाई गई है।
डिजाइन में तकनीकी का समावेश
इस पुल का डिजाइन जहां इंटरनेशनल कंसल्टेंट TYPSA द्वारा बनाया गया है तो वही IIT चेन्नई व IIT बॉम्बे द्वारा डिजाइन को सत्यापित किया गया है। ब्रिज के केंद्र में 72.5 मीटर का वर्टिकल लिफ्ट स्पैन है, जिसे जहाजों के आकार के हिसाब से ऊपर-नीचे किया जा सकता है।
आस्था का संगम
पांबन ब्रिज का भगवान राम और भगवान शिव के साथ सीधा संबंध है। यहां स्थित रामेश्वरम मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। 6 अप्रैल 2025 को राम नवमी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे राष्ट्र को समर्पित करेंगे।