
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में दिनांक 18 मार्च को योग विभाग एवं योग वेलनेस सेंटर के संयुक्त तत्वावधान में ‘डिजिटल युग की चुनौतियां एवं संभावनाएं’ विषय पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। इसके अतिरिक्त मुख्य तौर पर शिक्षा विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राज शरण शाही, योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह, पौलेंड के यूजेनियस पियासेकी शारीरिक शिक्षा विश्वविद्यालय की कटाऱजीना मीक्जनिक एवं आयोजन सचिव डॉ. नरेंद्र सिंह मंच पर मौजूद रहे। इसके अतिरिक्त दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर की प्रो. सुषमा पांडेय ऑनलाइन माध्यम से जुड़ी !
विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सोशल मीडिया और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का उपयोग तभी सार्थक सिद्ध होगा जब वह हमारे ज्ञान में वास्तविक वृद्धि करे। वर्तमान समय में लोग इन तकनीकों का उपयोग सीखने और समझ विकसित करने के बजाय शॉर्टकट अपनाने के लिए कर रहे हैं, जिसके दुष्परिणाम अवसाद, चिंता, सामाजिक अलगाव और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के रूप में सामने आ रहे हैं।
शिक्षा विभाग, बीबीएयू के विभागाध्यक्ष एवं संकायाध्यक्ष प्रो. राज शरण ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का अंतिम उद्देश्य केवल लक्ष्य प्राप्ति तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसका व्यापक स्वरूप लोक कल्याण से जुड़ा होना आवश्यक है। उन्होंने चिंता जताई कि एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 18 वर्षों में पहली बार ऐसा देखा गया है कि वर्तमान पीढ़ी का औसत आईक्यू (IQ) पूर्ववर्ती पीढ़ी की तुलना में कम हुआ है, जिसका एक प्रमुख कारण युवाओं का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डिजिटल तकनीकों पर अत्यधिक निर्भर होना है।
दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय, गोरखपुर की प्रो. सुषमा पांडेय ने कहा कि जीवन के प्रारंभिक चरणों में शारीरिक और मानसिक विकास तेजी से होता है, लेकिन इसी समय में आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट का प्रभाव भी तेजी से बढ़ रहा है।
योग विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. दीपेश्वर सिंह ने सोशल मीडिया के दुष्परिणामों पर विस्तार से चर्चा की तथा इसके कारण उत्पन्न हो रही समस्याओं को सुधारने में योग की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि योग न केवल मानसिक तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक है, बल्कि यह व्यक्ति को संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए भी प्रेरित करता है।
इस अवसर पर प्रतिभागियों के लिए विशेष व्याख्यान सत्र का आयोजन किया गया। जिसमें वक्ता के तौर पर बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय की मनोवैज्ञानिक विशेषज्ञ डॉ. नगमा जावेद, पौलेंड की कटाऱजीना मीक्जनिक, छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के डॉ. रामकिशोर एवं डॉ. नवीन जी. एच. उपस्थित रहे।
डॉ. नगमा जावेद ने ‘डिजिटल युवा मानसिक स्वास्थ्य हस्तक्षेप में युवाओं की भागीदारी के अवरोधक और सहायक कारक विषय पर अपने विचार व्यक्त किये।
अंत में आयोजन सचिव डॉ. नरेंद्र सिंह ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।