
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय में बुधवार 18 मार्च को ऐमीनेंट लेक्चर सीरीज कमेटी की ओर से ‘सतत विकास के लिए औद्योगिक अपशिष्ट के स्वास्थ्य संबंधी खतरे एवं उनका प्रबंधन’ विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने की। मुख्य वक्ता के तौर पर एन्वॉयरमेंटल माइक्रोबायोलॉजी विभाग के प्रो. राम चंद्रा उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त मंच पर प्रो. सुनीता मिश्रा एवं ऐमीनेंट लेक्चर सीरीज कमेटी की चेयरपर्सन एवं कार्यक्रम संयोजक प्रो. शिल्पी वर्मा मंच पर उपस्थित रहीं। मंच संचालन का कार्य डॉ. रमेश चंद्र नैनवाल द्वारा किया गया।

विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल ने अपने संबोधन में कहा कि पाश्चात्य सोच संसाधनों के अनियंत्रित एवं अनुचित दोहन को बढ़ावा देती है, जो वर्तमान समय में एक गंभीर चिंता का विषय बन चुका है। उन्होंने बताया कि पृथ्वी के भीतर प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवन (regenerative) क्षमता विद्यमान होती है, जो संसाधनों के संतुलन को बनाए रखने में सहायक होती है, किंतु आधुनिकता और विकास की अंधी दौड़ में मनुष्य द्वारा संसाधनों का अत्यधिक एवं असंतुलित दोहन किया जा रहा है। इसके परिणामस्वरूप पर्यावरणीय असंतुलन, प्रदूषण तथा प्राकृतिक संसाधनों के क्षय जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं।
मुख्य वक्ता प्रो. राम चंद्रा ने सतत विकास के लिए औद्योगिक अपशिष्ट के स्वास्थ्य संबंधी खतरे एवं उनका प्रबंधन विषय पर अपने विचार रखते हुए कहा कि औद्योगिक अपशिष्ट की समस्या का मुख्य कारण जानकारी का अभाव, दुष्प्रभावों को समझे बिना तीव्र विकास तथा नियामक संस्थाओं और शोधकर्ताओं के बीच समन्वय की कमी है। उन्होंने बताया कि पर्यावरण से जुड़े गंभीर मुद्दों पर वैश्विक स्तर पर स्टॉकहोम सम्मेलन (1972), रियो पृथ्वी सम्मेलन (1992), मिलेनियम डेवलपमेंट गोल्स (MDG) तथा सतत विकास लक्ष्य (SDG) के अंतर्गत व्यापक विचार-विमर्श किया गया है और इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रयास किए गए हैं।
कार्यक्रम के दौरान प्रो. राम चंद्र ने शिक्षकों एवं विद्यार्थियों द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर अत्यंत स्पष्टता, सरलता एवं प्रभावशाली ढंग से प्रदान किए।
अंत में डॉ. अर्पित शैलेश ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम के दौरान विभिन्न संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, गैर शिक्षण अधिकारी एवं कर्मचारी, शोधार्थी एवं विद्यार्थी मौजूद रहे।