
चित्रकूट/ दीनदयाल शोध संस्थान द्वारा संचालित सुरेंद्रपाल ग्रामोदय विद्यालय, चित्रकूट ने एक बार फिर उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा को आगे बढ़ाते हुए कक्षा आठवीं तथा कक्षा पाँचवीं की बोर्ड परीक्षाओं में शानदार सफलता प्राप्त की है। कक्षा आठवीं में 95 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों ने सफलता हासिल कर विद्यालय को चित्रकूट क्षेत्र में अव्वल स्थान दिलाया, जबकि कक्षा पाँचवीं का परीक्षा परिणाम भी लगभग 87 प्रतिशत रहा। यह उपलब्धि विद्यालय की सतत शैक्षणिक मेहनत, अनुशासन और संस्कारपूर्ण वातावरण का प्रमाण है।

विद्यालय के प्राचार्य जितेंद्र श्रीवास्तव तथा प्रधानाचार्य अंशुमान पाठक ने सफल छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को हार्दिक बधाई एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएँ दीं। प्राचार्य जितेंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि नानाजी देशमुख द्वारा स्थापित यह संस्था विगत 35 वर्षों से ग्रामीण परिवेश के विद्यार्थियों को उत्कृष्ट एवं मूल्यपरक शिक्षा प्रदान करती आ रही है और आज यह क्षेत्र का एक आदर्श शिक्षा केंद्र बन चुकी है।

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने भी विद्यालय परिवार और अभिभावकों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। परीक्षा प्रभारी अशोक दीक्षित ने बताया कि विद्यालय निरंतर उत्कृष्ट परिणाम देने के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण एवं संस्कारपरक शिक्षा को अपना मुख्य ध्येय मानकर आगे बढ़ रहा है।

सुरेंद्रपाल ग्रामोदय विद्यालय, चित्रकूट के विद्यार्थियों ने एक बार पुनः अपनी प्रतिभा और परिश्रम का अद्भुत परिचय देते हुए शैक्षणिक उपलब्धियों की नई ऊँचाइयों को स्पर्श किया है। कक्षा आठवीं में आस्था पांडेय ने 91.8 प्रतिशत अंक अर्जित कर प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि श्रद्धा यादव 91.1 प्रतिशत अंकों के साथ द्वितीय स्थान पर रहीं। रिया सिंह ने 90.1 प्रतिशत अंक प्राप्त कर तृतीय स्थान हासिल किया। इन छात्राओं की सफलता विद्यालय की उत्कृष्ट शैक्षणिक परंपरा का उज्ज्वल उदाहरण है।

इसी क्रम में कक्षा पाँचवीं में अंग्रेजी संभाषण की कक्षाओं में आदित्य कुमार सोनी ने प्रथम, शिवा सिंह ने द्वितीय तथा रवी राज प्रजापति ने तृतीय स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का परचम लहराया। वहीं हिंदी माध्यम के विद्यार्थियों में कृष्णा प्रजापति ने प्रथम, अनन्या देवी ने द्वितीय एवं अंशिका देवी ने तृतीय स्थान अर्जित किया।

विद्यालय परिवार ने इन सभी होनहार छात्र-छात्राओं तथा उनके अभिभावकों को हार्दिक बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल एवं स्वर्णिम भविष्य की मंगलकामनाएँ व्यक्त की हैं। शैक्षणिक अनुसंधान केन्द्र के प्रभारी कालका प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा यह उपलब्धि न केवल विद्यार्थियों के परिश्रम का परिणाम है, बल्कि विद्यालय के संस्कारयुक्त शैक्षणिक वातावरण की सार्थकता को भी दर्शाती है।