
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, देहरादून : उत्तराखंड सरकार ने बजट की तैयारियों के बीच आर्थिक सर्वेक्षण को अधिक पेशेवर बनाने की पहल की है । पहली बार बाहरी विशेषज्ञ संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) को इसमें शामिल किया गया है, ताकि राज्य की आर्थिक स्थिति का सटीक आकलन हो सके। सरकार का कहना है कि इसी रिपोर्ट के आधार पर आगामी बजट की प्राथमिकताएं तय की जाएंगी और विकास के प्रमुख सेक्टरों की दिशा निर्धारित होगी। राज्य सरकार 9 मार्च 2026 से गैरसैंण में शुरू होने वाले बजट सत्र में वित्त वर्ष 2026-27 का आर्थिक सर्वेक्षण पेश करेगी।
प्रमुख सचिव डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम के अनुसार आर्थिक सर्वेक्षण किसी भी वित्तीय वर्ष में विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का समग्र आकलन करता है। पहले इसे अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की टीम तैयार करती थी, लेकिन इस बार गुणवत्ता और पेशेवर दृष्टिकोण को मजबूत करने के लिए NCAER को भी इसमें शामिल किया गया है, जो भारत सरकार से संबद्ध प्रमुख आर्थिक शोध संस्था है।
बजट से पहले साझा किए जाएंगे प्रमुख संकेतक
सरकार ने केंद्र की तर्ज पर पिछले वर्ष से बजट से पहले आर्थिक सर्वेक्षण के प्रमुख संकेतकों को सार्वजनिक करने की परंपरा भी शुरू की है। इससे सरकार की आर्थिक नीतियों और बजट की प्राथमिकताओं को समझने में आसानी होगी।
इस वर्ष का आर्थिक सर्वेक्षण NCAER और राज्य के अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी विभाग की टीम के संयुक्त प्रयास से तैयार किया गया है, जिसमें राज्य की आर्थिक स्थिति, विकास दर, विभिन्न क्षेत्रों की उपलब्धियों और चुनौतियों से जुड़े प्रमुख आंकड़े शामिल किए गए हैं।
बजट की दिशा तय करने में बनेगा मार्गदर्शक
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में राज्य सरकार समावेशी विकास पर जोर दे रही है। वित्तीय प्रबंधन में दक्षता के लिए केंद्र सरकार ने राज्य को 350 करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि भी स्वीकृत की है।
सरकार का कहना है कि आर्थिक सर्वेक्षण की यह रिपोर्ट वित्त विभाग के लिए एक महत्वपूर्ण मार्गदर्शक दस्तावेज के रूप में काम करेगी और आगामी बजट की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएगी।