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	<title>हरियाणा Archives - Suryoday Bharat</title>
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	<lastBuildDate>Tue, 28 Jul 2026 11:25:24 +0000</lastBuildDate>
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		<title>भारत की कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी नेपाल पहुँची, जिससे सीमा &#8211; पार व्यापार और कनेक्टिविटी की शुरुआत हुई</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 28 Jul 2026 11:24:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, कोलकाता : भारतीय रेलवे ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक पहली सीधी कमर्शियल कंटेनर फ्रेट ट्रेन चलाकर भारत-नेपाल के बीच माल ढुलाई कनेक्टिविटी को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कैनोला का कंसाइनमेंट ले जा रही 40 वैगन वाली इस ट्रेन ने &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-28-at-16.41.50.jpeg" alt="" class="wp-image-316692" style="width:840px;height:auto" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, कोलकाता : </strong>भारतीय रेलवे ने कोलकाता पोर्ट से नेपाल के विराटनगर कस्टम्स यार्ड तक पहली सीधी कमर्शियल कंटेनर फ्रेट ट्रेन चलाकर भारत-नेपाल के बीच माल ढुलाई कनेक्टिविटी को मज़बूत करने की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। कैनोला का कंसाइनमेंट ले जा रही 40 वैगन वाली इस ट्रेन ने संशोधित भारत-नेपाल रेल ट्रांज़िट प्रोटोकॉल के तहत अपनी यात्रा पूरी की, जो रेल-आधारित सीमा-पार माल ढुलाई के क्षेत्र में एक नए अध्याय की शुरुआत है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस सफल ऑपरेशन से कोलकाता पोर्ट से विराटनगर तक कंटेनर वाले कार्गो को बिना बॉर्डर पर सामान बदले (ट्रांसशिपमेंट) सीधे रेल से ले जाना संभव हो गया है। उम्मीद है कि इस नई व्यवस्था से सामान ले जाने में लगने वाले समय, लॉजिस्टिक्स की लागत और कार्गो हैंडलिंग में काफी कमी आएगी, साथ ही दोनों पड़ोसी देशों के बीच सीमा-पार व्यापार की दक्षता, विश्वसनीयता और प्रतिस्पर्धात्मकता भी बेहतर होगी। यह उपलब्धि संशोधित भारत-नेपाल रेल ट्रांजिट प्रोटोकॉल को लागू करने से संभव हुई है, जो दोनों देशों के बीच माल के निर्बाध एंड-टू-एंड रेल परिवहन को आसान बनाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह उपलब्धि जोगबनी (भारत) और विराटनगर (नेपाल) के बीच ब्रॉड-गेज रेल लिंक पर आधारित है ! नवंबर 2025 में संशोधित &#8216;लेटर ऑफ़ एक्सचेंज&#8217; (LoE) पर हस्ताक्षर के बाद, अब विराटनगर के लिए सीधी कमर्शियल रेल सेवा शुरू हो गई है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग के नए अवसर खुल गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस सीधी माल ढुलाई सेवा से आयात-निर्यात वाले सामान की आवाजाही को काफी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, क्योंकि यह परिवहन का एक तेज़, सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल तरीका है। कई हैंडलिंग पॉइंट्स को कम करके और सप्लाई चेन की क्षमता को बेहतर बनाकर, यह पहल निर्यातकों, आयातकों, लॉजिस्टिक्स ऑपरेटरों और सीमा-पार व्यापार में शामिल उद्योगों को फायदा पहुंचाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह उपलब्धि भारतीय रेलवे के अंतरराष्ट्रीय रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाने, माल ढुलाई लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने और आधुनिक परिवहन बुनियादी ढांचे के माध्यम से &#8216;ईज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नेस&#8217; (व्यापार करने में आसानी) को बेहतर बनाने के सरकार के विज़न का समर्थन करने पर लगातार ध्यान केंद्रित करने को भी दर्शाती है। रेल-आधारित माल ढुलाई में वृद्धि से लॉजिस्टिक्स लागत कम होगी, कार्गो की विश्वसनीयता बढ़ेगी और परिवहन अधिक पर्यावरण-अनुकूल होगा, साथ ही पड़ोसी देशों के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी को भी बढ़ावा मिलेगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नेपाल के लिए पहली सीधी कमर्शियल कंटेनर मालगाड़ी का सफल संचालन भारतीय रेलवे के एक ऐसे एकीकृत, कुशल और भविष्य के लिए तैयार माल ढुलाई नेटवर्क के निर्माण के प्रयासों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि है, जो क्षेत्रीय व्यापार, आर्थिक विकास और निर्बाध अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिविटी का समर्थन करता है।</p>
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		<item>
		<title>उत्तर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था का अध्ययन करने लखनऊ पहुंची हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/haryana-assemblys-education-committee-arrives-in-lucknow-to-study-uttar-pradeshs-education-system/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:33:01 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>अशोक यादव, लखनऊ : उत्तर प्रदेश की बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था, शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यालयी अवस्थापना सुविधाओं तथा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का अध्ययन करने के लिए हरियाणा विधानसभा की उच्चस्तरीय समिति सोमवार को लखनऊ पहुंची। समिति ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक स्कूल &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.22-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-316637" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>अशोक यादव, लखनऊ :</strong> उत्तर प्रदेश की बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था, शैक्षिक गुणवत्ता, विद्यालयी अवस्थापना सुविधाओं तथा शिक्षा क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों का अध्ययन करने के लिए हरियाणा विधानसभा की उच्चस्तरीय समिति सोमवार को लखनऊ पहुंची। समिति ने अपर मुख्य सचिव, बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी सहित शिक्षा विभाग के अधिकारियों के साथ विधानसभा सभागार में बैठक कर उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधारों और नवाचारों की जानकारी प्राप्त की। समिति में हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति के चेयरपर्सन लक्ष्मण सिंह यादव सहित अन्य सदस्यगण शामिल रहे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में अपर मुख्य सचिव बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा पार्थ सारथी सेन शर्मा के द्वारा उत्तर प्रदेश की बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था के विभिन्न आयामों, विद्यालयी अवस्थापना के सुदृढ़ीकरण, शैक्षिक गुणवत्ता में सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण, डिजिटल एवं स्मार्ट शिक्षा, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन, व्यावसायिक शिक्षा, निगरानी एवं जवाबदेही की डिजिटल व्यवस्था तथा विभिन्न अभिनव योजनाओं का विस्तृत प्रस्तुतिकरण किया गया। हरियाणा विधानसभा की समिति के सदस्यों ने उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की और प्रदेश के मॉडल को उपयोगी एवं अनुकरणीय बताया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="682" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.22-1-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-316638" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.22-1-1024x682.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.22-1-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.22-1-768x512.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.22-1-1536x1023.jpeg 1536w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.22-1.jpeg 1600w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में बताया गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश सरकार ने विद्यालयों में बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराने के साथ-साथ आधारभूत सुविधाओं के विकास पर विशेष ध्यान दिया है। ऑपरेशन विद्यालय कायाकल्प के माध्यम से विद्यालयों में स्वच्छ, सुरक्षित और बाल हितैषी वातावरण तैयार किया गया है। वर्ष 2017-18 के बाद विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं के विभिन्न मानकों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। सुरक्षित पेयजल, बालक-बालिका शौचालय, रनिंग वाटर, हैंडवॉशिंग यूनिट, कक्षा-कक्षों में टाइल्स, विद्युतीकरण, रैंप एवं रेलिंग, भवनों की रंगाई-पुताई, रसोईघर, बाउंड्रीवाल तथा अन्य सुविधाओं में व्यापक स्तर पर संतृप्ति हासिल की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">प्रस्तुतिकरण में बताया गया कि ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत विभिन्न विभागों, ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, जिला खनिज निधि, मनरेगा, विकास प्राधिकरण, कॉरपोरेट सामाजिक दायित्व और सामुदायिक सहभागिता जैसे विभिन्न स्रोतों के माध्यम से विद्यालयों की अवस्थापना सुविधाओं को मजबूत किया गया। प्रदेश में 1.33 लाख विद्यालयों में 19 मूलभूत बाल हितैषी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कार्य किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">समिति को मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय योजना के बारे में भी जानकारी दी गई। योजना के अंतर्गत प्रत्येक जनपद में दो विद्यालयों की स्थापना का प्रावधान है। कुल 150 विद्यालयों को विकसित किए जाने की योजना है, जिसके लिए 4,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इन विद्यालयों में प्री-प्राइमरी से कक्षा-12 तक की शिक्षा, ड्रीम लैब, कंप्यूटर एवं लैंग्वेज लैब, स्मार्ट क्लास, रोबोटिक्स एवं मशीन लर्निंग, विज्ञान-गणित प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं, मिनी स्टेडियम, ओपन जिम, सोलर पैनल, वर्षाजल संचयन, आरओ एवं यूवी वाटर प्लांट, आधुनिक अग्निशमन व्यवस्था तथा ऑनलाइन सीसीटीवी निगरानी जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसी प्रकार मुख्यमंत्री अभ्युदय कंपोजिट विद्यालयों के उच्चीकरण की योजना के अंतर्गत 75 विद्यालयों को आधुनिक सुविधाओं से युक्त किया जा रहा है। इन विद्यालयों में स्मार्ट क्लास, विज्ञान, गणित, रोबोटिक्स एवं मशीन लर्निंग की मॉड्यूलर लैब, बाल वाटिका, पोषण वाटिका, वाई-फाई, सीसीटीवी निगरानी, बाल सुलभ फर्नीचर तथा अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में प्रोजेक्ट अलंकार के माध्यम से विद्यालयों में अवस्थापना सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत सुरक्षित पेयजल, शौचालय, प्रयोगशालाएं, स्मार्ट क्लास, कंप्यूटर लैब, पुस्तकालय, सोलर पैनल, सीसीटीवी कैमरा, वाई-फाई, खेल मैदान, मल्टीपरपज हॉल, वर्षाजल संचयन, विद्युत व्यवस्था और अन्य सुविधाओं का विकास किया जा रहा है। राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में मल्टीपरपज हॉल, प्रयोगशालाओं, अतिरिक्त कक्षा-कक्ष, चहारदीवारी, खेल मैदान, स्वच्छ पेयजल और पृथक शौचालय जैसी सुविधाओं का बड़े पैमाने पर निर्माण एवं सुदृढ़ीकरण किया गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="682" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.20-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-316639" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.20-1024x682.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.20-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.20-768x512.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.20-1536x1023.jpeg 1536w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.20.jpeg 1600w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में बताया गया कि विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न शैक्षिक संकेतकों में भी सकारात्मक सुधार हुआ है। माध्यमिक स्तर पर रिटेंशन रेट, सकल नामांकन अनुपात और उच्च माध्यमिक स्तर पर संक्रमण दर में वृद्धि दर्ज की गई है। प्राथमिक स्तर पर ड्रॉपआउट दर शून्य रही है। नामांकन बढ़ाने और ड्रॉपआउट कम करने के लिए विद्यालयों की स्थापना, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उच्चीकरण, मुख्यमंत्री मॉडल कंपोजिट विद्यालय, गैर-शैक्षिक रूप से पिछड़े विकासखंडों में आवासीय बालिका विद्यालय तथा प्रोजेक्ट अलंकार जैसी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शिक्षा की गुणवत्ता और सीखने के परिणामों में सुधार के लिए शिक्षक प्रशिक्षण, प्रभावी शिक्षक संकुल बैठकें, अकादमिक कैलेंडर, दैनिक पाठ योजना, प्रिंट-समृद्ध शिक्षण सामग्री, दक्षता आधारित आकलन, कैच-अप शिक्षण, सक्रिय पुस्तकालय एवं रीडिंग कॉर्नर, समाचार-पत्र पठन तथा लेखन दक्षता पर विशेष जोर दिया जा रहा है। विद्यार्थियों की प्रगति का आकलन दक्षता आधारित मूल्यांकन और HPC के माध्यम से किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शिक्षकों की क्षमता वृद्धि के लिए राज्य, जनपद और विकासखंड स्तर पर व्यापक प्रशिक्षण व्यवस्था संचालित है। DIKSHA पर 16,000 से अधिक डिजिटल शिक्षण सामग्री उपलब्ध हैं। शिक्षकों को डिजिटल साक्षरता, कम्प्यूटेशनल थिंकिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे आधुनिक विषयों में प्रशिक्षित किया जा रहा है। आईआईआईटी लखनऊ, आईआईटी कानपुर और आईआईएम अहमदाबाद जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों के सहयोग से भी शिक्षकों एवं शैक्षिक अधिकारियों का क्षमता विकास किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">उत्तर प्रदेश में शिक्षक प्रशिक्षण और शैक्षिक क्षमता निर्माण के लिए डायट संस्थानों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जा रहा है। पहले चरण में 13 डायट संस्थानों के लिए 103 करोड़ रुपये की स्वीकृति दी गई है, जबकि दूसरे चरण में 14 डायट संस्थानों के विकास के लिए लगभग 198 करोड़ रुपये का अनुमोदन किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में डिजिटल और स्मार्ट शिक्षा के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश की उपलब्धियों को भी प्रस्तुत किया गया। प्रदेश में 37,266 प्राथमिक एवं 3,775 माध्यमिक विद्यालयों में स्मार्ट क्लास की सुविधा उपलब्ध है। 33,800 प्राथमिक और 3,307 माध्यमिक विद्यालयों में आईसीटी लैब स्थापित हैं। विद्यालयों में डिजिटल संसाधनों के प्रभावी उपयोग के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षित किया गया है और स्मार्ट क्लास के माध्यम से नियमित रूप से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से संवाद किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के क्रियान्वयन के तहत बालवाटिका को आधारभूत साक्षरता एवं संख्याज्ञान की मजबूत नींव के रूप में विकसित किया जा रहा है। प्रदेश में 71,877 विद्यालयों में को-लोकेटेड आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं, जिनमें लगभग 38 लाख बच्चे नामांकित हैं। बालवाटिका को शैक्षिक सामग्री, आकलन व्यवस्था, खेल आधारित गतिविधियों और शिक्षक प्रशिक्षण के माध्यम से मजबूत किया जा रहा है। बालवाटिका से कक्षा-1 में सुगम संक्रमण के लिए दो चरणों में स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.21-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-316640" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.21-1024x682.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.21-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.21-768x512.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.21-1536x1023.jpeg 1536w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-27-at-18.09.21.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">समिति को ‘लर्निंग बाय डूइंग’ प्री-स्किलिंग कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी दी गई। कक्षा 6 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए वर्कशॉप एवं इंजीनियरिंग, ऊर्जा एवं पर्यावरण, कृषि-उद्यान एवं नर्सरी तथा होम एवं हेल्थ केयर जैसे ट्रेड शामिल किए गए हैं। वर्तमान में 5,562 उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालय इस कार्यक्रम से आच्छादित हैं, जिसे चरणबद्ध तरीके से सभी उच्च प्राथमिक एवं कंपोजिट विद्यालयों तक विस्तारित किया जाना है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">माध्यमिक स्तर पर व्यावसायिक शिक्षा को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रवीण के अंतर्गत वर्ष 2026-27 में 506 लैब स्थापित किए जाने की कार्रवाई चल रही है। समग्र शिक्षा के अंतर्गत 1,701 राजकीय माध्यमिक विद्यालयों में व्यावसायिक शिक्षा संचालित है और लगभग 1.35 लाख विद्यार्थी इससे आच्छादित हैं। इसके अतिरिक्त 16 ट्रेड संचालित किए जा रहे हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में ड्रीम लैब योजना को भी विशेष रूप से प्रस्तुत किया गया। उद्योग समूहों के सहयोग से माध्यमिक विद्यालयों में डिजाइन इनोवेशन, कंप्यूटर एडेड मशीनिंग, एआर-वीआर एवं इंडस्ट्रियल रोबोटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, आईआईओटी, एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग, ड्रोन, ऑटोमोबाइल एवं बैटरी ईवी जैसे आधुनिक विषयों में विद्यार्थियों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रत्येक मंडल में विद्यालयों को हब एवं स्पोक मॉडल के माध्यम से जोड़ा जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निगरानी और जवाबदेही के लिए विद्या समीक्षा केंद्र तथा विभिन्न डिजिटल एप्लीकेशन और डैशबोर्ड का उपयोग किया जा रहा है। प्रशासनिक एवं अकादमिक संकेतकों के आधार पर विद्यालयों की निगरानी की जा रही है। निरीक्षण व्यवस्था, शिक्षक एवं छात्र उपस्थिति, विद्यार्थी सीखने के परिणाम, DIKSHA, मानव संपदा और UDISE जैसे डिजिटल स्रोतों से प्राप्त आंकड़ों के आधार पर प्रभावी अनुश्रवण किया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बैठक में मानव संपदा पोर्टल के माध्यम से लगभग 5.96 लाख शिक्षकों एवं कर्मचारियों का डेटाबेस तैयार किए जाने, सेवा पुस्तिकाओं के रखरखाव, वेतन एवं अन्य देयकों के ऑनलाइन भुगतान तथा विभिन्न मानव संसाधन सेवाओं को डिजिटल किए जाने की जानकारी भी दी गई।</p>



<p class="wp-block-paragraph">समिति को ‘निपुण भारत मिशन’ के विस्तार, पठन संस्कृति एवं समाचार-पत्र पठन अभियान, बाल मेलों, रचनात्मक गतिविधियों, ‘एक कस्तूरबा एक खेल’ पहल, गैर-ईबीबी ब्लॉकों में आवासीय बालिका विद्यालयों की स्थापना, शोध एवं नवाचार तथा ‘उद्गम’ जैसे प्रयासों के बारे में भी जानकारी दी गई। शिक्षा क्षेत्र में शोध और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए शिक्षकों एवं शिक्षक-प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है तथा शैक्षिक नवाचारों को साझा करने के लिए मंच उपलब्ध कराया जा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हरियाणा विधानसभा की शिक्षा समिति ने उत्तर प्रदेश में बेसिक और माध्यमिक शिक्षा के क्षेत्र में अवस्थापना विकास, डिजिटल तकनीक के उपयोग, शिक्षक प्रशिक्षण, कौशल एवं व्यावसायिक शिक्षा, निगरानी व्यवस्था तथा शैक्षिक नवाचारों की सराहना की। समिति के सदस्यों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में शिक्षा के क्षेत्र में किए जा रहे व्यापक सुधार और नवाचार अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी अनुभव प्रदान करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">योगी सरकार के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को केवल विद्यालयों की संख्या बढ़ाने तक सीमित न रखते हुए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक अवस्थापना, डिजिटल तकनीक, कौशल विकास, शिक्षक क्षमता निर्माण और विद्यार्थियों के समग्र विकास से जोड़ा गया है। प्रदेश सरकार का लक्ष्य है कि प्रत्येक विद्यार्थी को गुणवत्तापूर्ण, समान और आधुनिक शिक्षा का अवसर मिले तथा उत्तर प्रदेश ज्ञान, कौशल और नवाचार के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बने।</p>
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		<title>बीबीएयू और सीबीएलयू मिलकर करेंगे शिक्षा, शोध और नवाचार को सशक्त, एमओयू पर हुए हस्ताक्षर</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/bbau-and-cblu-to-jointly-strengthen-education-research-and-innovation-mou-signed/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Mon, 27 Jul 2026 13:31:11 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तर प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ एवं चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी के मध्य वर्चुअल माध्यम से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू हस्ताक्षर समारोह में बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल तथा सीबीएलयू की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी की गरिमामयी उपस्थिति रही। एमओयू &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="337" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-26-at-13.49.36-1024x337.jpeg" alt="" class="wp-image-316602" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ :</strong> बाबासाहेब भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय (बीबीएयू), लखनऊ एवं चौधरी बंसी लाल विश्वविद्यालय (सीबीएलयू), भिवानी के मध्य वर्चुअल माध्यम से एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। एमओयू हस्ताक्षर समारोह में बीबीएयू के कुलपति प्रो. राज कुमार मित्तल तथा सीबीएलयू की कुलपति प्रो. दीप्ति धर्माणी की गरिमामयी उपस्थिति रही। एमओयू पर बीबीएयू के कुलसचिव डॉ. अश्विनी कुमार सिंह एवं सीबीएलयू की कुलसचिव प्रो. भावना शर्मा ने औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस एमओयू का उद्देश्य दोनों विश्वविद्यालयों के बीच शैक्षणिक सहयोग को सुदृढ़ बनाना है। इसके अंतर्गत शैक्षिक मल्टीमीडिया अनुसंधान केंद्र (ईएमआरसी), लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) तथा मैसिव ओपन ऑनलाइन कोर्सेज (एमओओसी) के माध्यम से पारस्परिक ऑनलाइन व्याख्यानों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही कौशल विकास, उद्यमिता, नवाचार तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के प्रभावी क्रियान्वयन के क्षेत्रों में सहयोग स्थापित कर समाज के समग्र विकास में योगदान दिया जाएगा। साथ ही दोनों विश्वविद्यालयों की आपसी सहमति के अनुसार इस सहयोग के अंतर्गत शैक्षणिक संसाधनों का आदान-प्रदान किया जाएगा तथा इस व्यवस्था के कारण किसी भी विश्वविद्यालय पर कोई अतिरिक्त वित्तीय दायित्व नहीं आएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर बीबीएयू की ओर से प्रो. राम चंद्रा, प्रो. शिल्पी वर्मा, प्रो. नवीन कुमार अरोड़ा, प्रो. सुभाष मिश्रा, प्रो. धीरेंद्र पांडेय एवं डॉ. सुदर्शन चक्रधारी उपस्थित रहे। वहीं सीबीएलयू की ओर से प्रो. दिनेश मदान, प्रो. संजीव, प्रो. सुरेंद्र कौशिक, प्रो. पवन गुप्ता, प्रो. ललिता गुप्ता, प्रो. सुरेश मलिक, प्रो. मयंक किंगर तथा प्रो. नितिन बंसल ने सहभागिता की।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस एमओयू के प्रभावी क्रियान्वयन एवं समन्वय का दायित्व प्रो. सुनीता भारतवाल एवं डॉ. अर्पित शैलेश को सौंपा गया है, जो इस साझेदारी के अंतर्गत विभिन्न शैक्षणिक एवं संस्थागत गतिविधियों के संचालन और समन्वय का कार्य करेंगे।</p>
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		<title>3,000 लीटर डीज़ल के धुएँ की जगह केवल जलवाष्प का उत्सर्जन : भारत की हाइड्रोजन ट्रेन की कहानी</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 17:22:47 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जबलपुर / जयपुर / नई दिल्ली : भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को 17 जुलाई, 2026 को दिल्ली क्षेत्र में जींद–सोनीपत रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अब तक यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है, जिससे 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.03.jpeg" alt="" class="wp-image-316416" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जबलपुर / जयपुर / नई दिल्ली :</strong> भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को 17 जुलाई, 2026 को दिल्ली क्षेत्र में जींद–सोनीपत रेलखंड पर हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। अब तक यह ट्रेन 1,200 किलोमीटर से अधिक की सफल यात्रा पूरी कर चुकी है, जिससे 3,200 लीटर से अधिक डीज़ल की बचत हुई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह हाइड्रोजन ट्रेन हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच होने वाली रासायनिक अभिक्रिया से ट्रेन के भीतर ही बिजली उत्पन्न करती है। इस प्रक्रिया से ट्रेन को चलाने के लिए आवश्यक विद्युत ऊर्जा प्राप्त होती है तथा उप-उत्पाद के रूप में केवल जलवाष्प (Water Vapour) निकलती है। इसमें न धुआँ निकलता है और न ही टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे यह वर्तमान में उपलब्ध रेल प्रणोदन (Rail Propulsion) की सबसे स्वच्छ तकनीक बन जाती है।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="801" height="534" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.03-1.jpeg" alt="" class="wp-image-316417" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.03-1.jpeg 801w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.03-1-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.03-1-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 801px) 100vw, 801px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">यह परियोजना भारतीय रेल के नेतृत्व में विकसित एक पूर्णतः स्वदेशी पहल है। 10 कोच वाली इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार हैं, जो संयुक्त रूप से 2,400 किलोवाट शक्ति प्रदान करती हैं। इसके साथ लिथियम आयरन फॉस्फेट बैटरियाँ तथा हाइड्रोजन सिलेंडर भी लगाए गए हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस परियोजना के तहत जींद में भारतीय रेल की पहली समर्पित हाइड्रोजन भंडारण सुविधा स्थापित की गई है। यहाँ 500 Bar तक के दाब (Pressure) पर ग्रीन हाइड्रोजन का भंडारण तथा 350 Bar के दाब पर ईंधन भरने की व्यवस्था है। इस सुविधा की कुल भंडारण क्षमता लगभग 3,000 किलोग्राम है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ट्रेन में सुरक्षा के लिए अनेक स्वतंत्र प्रणालियाँ स्थापित की गई हैं, जो हाइड्रोजन रिसाव, अधिक तापमान, आग और धुएँ का स्वतः पता लगाती हैं। इनके साथ स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम, निरंतर वेंटिलेशन, अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा मानकों का अनुपालन तथा सभी अनिवार्य परीक्षण और सत्यापन भी सुनिश्चित किए गए हैं। जींद–सोनीपत रेलखंड पर सफल परिचालन के बाद जल्द ही इसका परीक्षण दिल्ली मार्ग पर भी प्रारंभ किया जाएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-full"><img loading="lazy" decoding="async" width="801" height="534" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.04.jpeg" alt="" class="wp-image-316418" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.04.jpeg 801w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.04-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-25-at-16.36.04-768x512.jpeg 768w" sizes="auto, (max-width: 801px) 100vw, 801px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन केवल एक तकनीकी उपलब्धि नहीं, बल्कि स्वदेशी हाइड्रोजन रेल इकोसिस्टम की स्थापना की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना सतत, शून्य-उत्सर्जन (Zero Emission) रेल परिवहन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती है तथा भविष्य में इसके व्यापक विस्तार और स्वच्छ परिवहन के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्व की मजबूत आधारशिला रखती है।</p>
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		<item>
		<title>न्यू रेवाड़ी रेलवे स्टेशन पर सघन वृक्षारोपण अभियान संपन्न</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/intensive-tree-plantation-drive-concluded-at-new-rewari-railway-station/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 25 Jul 2026 03:26:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जयपुर / रेवाड़ी : शुक्रवार 24.07.2026 क़ो आर. एस. चौधरी मुख्य महाप्रबंधक जयपुर के निर्देशानुसार न्यू रेवाड़ी स्टेशन पर परिचालन एवं व्यवसाय विकास विभाग द्वारा सघन वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। अभियान के दौरान स्टेशन परिसर में विभिन्न प्रकार के 500 से अधिक पौधे रोपित किए गए। कार्यक्रम में सभी &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="987" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-24-at-21.54.13-1024x987.jpeg" alt="" class="wp-image-316322" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जयपुर / रेवाड़ी : </strong>शुक्रवार 24.07.2026 क़ो आर. एस. चौधरी मुख्य महाप्रबंधक जयपुर के निर्देशानुसार न्यू रेवाड़ी स्टेशन पर परिचालन एवं व्यवसाय विकास विभाग द्वारा सघन वृक्षारोपण अभियान का आयोजन किया गया। अभियान के दौरान स्टेशन परिसर में विभिन्न प्रकार के 500 से अधिक पौधे रोपित किए गए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">कार्यक्रम में सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। स्टेशन इंचार्ज मनजीत के नेतृत्व में स्टेशन अधीक्षक रूपिल गर्ग एवं सभी स्टेशन मास्टर एंव अन्य कमर्चारियो की सक्रिय सहभागिता में अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर सभी ने पर्यावरण संरक्षण तथा लगाए गए पौधों के नियमित संरक्षण का संकल्प लिया।</p>
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			</item>
		<item>
		<title>भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन लगभग 2,600 यात्रियों के साथ सतत रेल परिवहन के लिए तैयार, शुक्रवार को उद्धघाटन</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/indias-first-hydrogen-fuel-cell-train-ready-for-sustainable-rail-transport-with-a-capacity-of-approximately-2600-passengers-to-be-inaugurated-on-friday/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 16 Jul 2026 17:44:57 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[प्रदेश]]></category>
		<category><![CDATA[राजस्थान]]></category>
		<category><![CDATA[रेलवे]]></category>
		<category><![CDATA[हरियाणा]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जबलपुर / नई दिल्ली : भारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए तैयार है। यह ट्रेन सबसे स्वच्छ ईंधन हाइड्रोजन का उपयोग करके स्वयं बिजली उत्पन्न करती है। उपयोग के समय इससे लगभग शून्य उत्सर्जन होता है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों &#8230;</p>
<p>The post <a href="https://suryodaybharat.com/indias-first-hydrogen-fuel-cell-train-ready-for-sustainable-rail-transport-with-a-capacity-of-approximately-2600-passengers-to-be-inaugurated-on-friday/">भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन लगभग 2,600 यात्रियों के साथ सतत रेल परिवहन के लिए तैयार, शुक्रवार को उद्धघाटन</a> appeared first on <a href="https://suryodaybharat.com">Suryoday Bharat</a>.</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-16-at-21.52.03.jpeg" alt="" class="wp-image-315460" style="width:840px;height:auto" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, जबलपुर / नई दिल्ली : </strong>भारतीय रेलवे देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए तैयार है। यह ट्रेन सबसे स्वच्छ ईंधन हाइड्रोजन का उपयोग करके स्वयं बिजली उत्पन्न करती है। उपयोग के समय इससे लगभग शून्य उत्सर्जन होता है। यह उपलब्धि भारतीय रेलवे द्वारा ट्रेनों को चलाने के तरीके में हुए विकास का एक नया अध्याय है, जो कोयले और भाप से स्वच्छ, अधिक टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों की ओर भारत की व्यापक यात्रा को दर्शाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">पिछले 12 वर्षों में तीव्र विद्युतीकरण ने आयातित डीजल पर निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है, जिससे स्वच्छ रेल परिवहन में अगली प्रगति का मार्ग प्रशस्त हुआ है। आज, 99 प्रतिशत से अधिक ब्रॉड गेज मार्गों के विद्युतीकरण के साथ, भारतीय रेलवे इस दिशा में एक कदम और आगे बढ़ रहा है। ओवरहेड लाइनों से बिजली लेने वाली पारंपरिक इलेक्ट्रिक ट्रेनों के विपरीत, हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेनसेट हाइड्रोजन और ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रतिक्रिया के माध्यम से ट्रेन के अंदर ही बिजली उत्पन्न करती है, जिसमें जल वाष्प एकमात्र उप-उत्पाद के रूप में उत्पन्न होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">एक तरह से देखा जाए तो, यह ट्रेन एक बार फिर से अपने ऊर्जा स्रोत का इस्तेमाल खुद करती है, जैसे कभी भाप और डीजल से चलने वाले इंजन करते थे। लेकिन कोयले या डीजल जैसे पारंपरिक ईंधन जलाने के बजाय, हाइड्रोजन वायुमंडल से ऑक्सीजन लेकर ट्रेन के अंदर बिजली पैदा करता है, जिससे दहन और बाहरी बिजली आपूर्ति पर निर्भरता खत्म हो जाती है। चूंकि स्वच्छ हाइड्रोजन तकनीक से ट्रेन के अंदर ही बिजली पैदा होती है, इसलिए यह ट्रेन रेल परिवहन का सबसे पर्यावरण-अनुकूल रूप है, जो सतत गतिशीलता के भविष्य को शक्ति प्रदान करती है। इस उन्नत प्रणोदन प्रणाली को और मजबूत बनाने के लिए, देश ने ट्रेन में बहुस्तरीय सुरक्षा प्रणालियां लगाई हैं जो हाइड्रोजन रिसाव, गर्मी, आग और धुएं का पता लगाने में सक्षम हैं। जिंद-सोनीपत खंड पर 75 किमी प्रति घंटे की परिचालन गति और 110 किमी प्रति घंटे की डिज़ाइन गति के साथ, यह ट्रेन न केवल सुरक्षित है बल्कि 89 किमी के इस मार्ग पर तेज भी है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वर्तमान में विश्व स्तर पर चलने वाली अधिकांश हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों में केवल दो या तीन कोच होते हैं और ये मुख्य रूप से छोटे क्षेत्रीय मार्गों पर ही संचालित होती हैं। इसके विपरीत, भारतीय रेलवे की ट्रेन को 10 कोच वाली यात्री ट्रेन के रूप में तैयार किया गया है, जिसकी क्षमता लगभग 2,600 यात्रियों की है। यह उच्च-क्षमता वाली यात्री सेवाओं के लिए हाइड्रोजन-संचालित रेल परिवहन की अनुकूलनशीलता को प्रदर्शित करता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाइड्रोजन अत्यंत ज्वलनशील होती है, और इससे स्वाभाविक रूप से सबके मन में एक सवाल उठता है: क्या हजारों यात्रियों को ऐसी ट्रेन में बिठाना सुरक्षित है जो इतनी आसानी से आग पकड़ सकती है? यहां ट्रेन के काम करने के तरीके और भारतीय रेलवे द्वारा इसे सुरक्षित बनाने के लिए उठाए गए कदमों की सरल व्याख्या दी गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाइड्रोजन ट्रेन वास्तव में कैसे काम करती है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">पारंपरिक डीज़ल इंजनों के विपरीत, जो यांत्रिक शक्ति उत्पन्न करने के लिए ईंधन जलाते हैं, हाइड्रोजन ट्रेन में एक प्रोटॉन एक्सचेंज मेम्ब्रेन (पीईएम) ईंधन सेल के रूप में एक छोटा विद्युत संयंत्र लगा होता है। ट्रेन के सिलेंडरों में संग्रहित हाइड्रोजन, ईंधन सेल के अंदर आसपास की हवा से ऑक्सीजन के साथ मिलकर विद्युत उत्पन्न करती है, जिससे कर्षण मोटरें चलती हैं और पहिए घूमते हैं। इस विद्युत रासायनिक अभिक्रिया के प्रत्यक्ष उप-उत्पाद केवल जल वाष्प और ऊष्मा हैं। इसमें कोई दहन, धुआं या टेलपाइप से कार्बन उत्सर्जन नहीं होता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरल शब्दों में कहें तो यह प्रक्रिया लगभग जादू जैसी है: हाइड्रोजन + ऑक्सीजन → बिजली + जल वाष्प → ट्रेन चलने लगती है। जो जादू जैसा दिखता है, वह वास्तव में विज्ञान का कमाल है, जो ट्रेन के अंदर ही हाइड्रोजन को सीधे बिजली में परिवर्तित करता है। इसका एकमात्र प्रत्यक्ष उप-उत्पाद जल वाष्प है। इसमें न तो धुआं निकलता है और न ही प्रत्यक्ष कार्बन उत्सर्जन होता है, जिससे भारतीय रेलवे के पर्यावरण संरक्षण में योगदान मिलता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस ट्रेन में दो हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कार (डीपीसी) और आठ ट्रेलर कोच (टीसी) शामिल हैं। प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार में ईंधन सेल, लिथियम आयरन फॉस्फेट (एलएफपी) बैटरी और हाइड्रोजन भंडारण सिलेंडर लगे होते हैं जो विभिन्न परिचालन स्थितियों में विश्वसनीय संचालन सुनिश्चित करते हुए कर्षण शक्ति प्रदान करने के लिए एक साथ काम करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">दोनों सिरों पर स्थित दो पावर कार, प्रत्येक ड्राइविंग पावर कार 1,200 किलोवाट (1600 एचपी) बिजली उत्पन्न करती हैं, जो पूरी ट्रेन को 110 किमी/घंटा की गति तक पहुंचाने के लिए पर्याप्त है। हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली यह ट्रेन शुरू में उत्तरी रेलवे के जिंद-सोनीपत खंड पर चलेगी, जो जिंद जंक्शन, गोहाना जंक्शन और सोनीपत को जोड़ती है और जिंद सिटी, पांडु पिंडारा जंक्शन, ललित खेड़ा हॉल्ट, भम्भेवा, इसापुर खेरी हॉल्ट, बुटाने हॉल्ट, खंडराई हॉल्ट, राब्रा हॉल्ट, लाठ हॉल्ट, मोहना, बरवासनी हॉल्ट और सोनीपत न्यू सहित मध्यवर्ती स्टेशनों और प्रस्तावित ठहरावों पर भी रुकेगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस मार्ग का चयन सामान्य परिचालन स्थितियों में हाइड्रोजन-संचालित यात्री रेल सेवाओं की परिचालन व्यवहार्यता, सुरक्षा और विश्वसनीयता को प्रदर्शित करने के लिए किया गया है। जिंद में स्थापित समर्पित हाइड्रोजन भंडारण, संपीड़न और वितरण सुविधा ईंधन भरने के कार्यों में सहयोग करेगी, जिससे भारत का पहला एकीकृत हाइड्रोजन रेलवे इकोसिस्&#x200d;टम तैयार होगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाइड्रोजन कहां से आता है? जिंद में ईंधन भरने का स्टेशन है</p>



<p class="wp-block-paragraph">पेट्रोल पंप या सीएनजी स्टेशन की तरह ही, ट्रेन को भी ईंधन भरने के लिए जगह चाहिए होती है, और इसी उद्देश्य से भारतीय रेलवे ने हरियाणा के जिंद में भारत की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन ईंधन भरने की सुविधा स्थापित की है। यह सुविधा तीन चरणों में संचालित होती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सबसे पहले, ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट में विद्युत अपघटन द्वारा हाइड्रोजन का उत्पादन किया जाता है, जिसमें बिजली का उपयोग करके पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में विभाजित किया जाता है, और फिर इसे विशेष भंडारण टैंकों में सुरक्षित रूप से संग्रहित किया जाता है। दूसरे, हाइड्रोजन को 500 बार तक संपीड़ित किया जाता है, जिससे कम जगह में अधिक मात्रा में हाइड्रोजन संग्रहित किया जा सकता है। अंत में, इसे दो स्वतंत्र हाइड्रोजन डिस्पेंसर के माध्यम से 350 बार के नियंत्रित दबाव पर वितरित किया जाता है, जिससे दोनों हाइड्रोजन ड्राइविंग पावर कारों को एक साथ ईंधन भरा जा सकता है और टर्नअराउंड समय कम हो जाता है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यह सुविधा एक समय में लगभग 3,000 किलोग्राम हाइड्रोजन का भंडारण करती है, जो ट्रेनसेट के नियमित संचालन को बनाए रखने के लिए पर्याप्त है, और इसकी भंडारण और आपूर्ति प्रणाली को पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) द्वारा अनुमोदित किया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">स्वदेशी क्षमताओं का निर्माण</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत में ही डिजाइन, इंजीनियरिंग और एकीकृत की गई यह ट्रेन स्वदेशी तकनीक का उपयोग करके विकसित की गई है, जो उन्नत रेलवे इंजीनियरिंग में देश की बढ़ती क्षमताओं को दर्शाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">देश की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल से चलने वाली ट्रेनसेट का विकास भारतीय रेलवे के नेतृत्व में हुआ है। रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइज़ेशन (आरडीएसओ) ने तकनीकी विशिष्टताओं को तैयार किया और डिज़ाइन अनुमोदन प्रक्रिया का नेतृत्व किया। ट्रेनसेट का एकीकरण मेसर्स मेधा सर्वो ड्राइव्स द्वारा किया गया है, जबकि इंटीग्रल कोच फैक्ट्री (आईसीएफ) ने ट्रेन की थीम और बाहरी डिज़ाइन में योगदान दिया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रेलगाड़ियों के पूरक के रूप में, भारतीय रेलवे ने जिंद में एक संपूर्ण हाइड्रोजन इकोसिस्&#x200d;टम स्थापित किया है, जिसमें इलेक्ट्रोलाइसिस के माध्यम से हाइड्रोजन उत्पादन, भंडारण, संपीड़न और वितरण अवसंरचना शामिल है, जो ट्रेन संचालन का समर्थन करती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाइड्रोजन आखिर है क्या, और यह लोगों को क्यों चिंतित करता है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">सरल शब्दों में कहें तो, हाइड्रोजन रंगहीन होती है, इसलिए इसे देखा या सूंघा नहीं जा सकता, और गंधहीन होने के कारण इसकी गंध भी नहीं आती। यह स्वादहीन भी होती है। यह विषैली नहीं होती, यानी इसके पास होने से आपको कोई नुकसान नहीं होगा। लोगों को जिस बात से डर लगता है, और यह डर जायज भी है, वह यह है कि यह अत्यधिक ज्वलनशील होती है और इसे बहुत सावधानी से उपयोग करना चाहिए। चूंकि हाइड्रोजन को देखा या सूंघा नहीं जा सकता, इसलिए इस परियोजना की संपूर्ण सुरक्षा योजना एक ही लक्ष्य पर आधारित है, जो है छोटे से छोटे रिसाव का भी तुरंत पता लगाना और उसे कभी भी खतरे में न बदलने देना।</p>



<p class="wp-block-paragraph">तो सुरक्षा वास्तव में कैसे सुनिश्चित की जाती है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस परियोजना के हर स्तर पर सुरक्षा को समाहित किया गया है। ट्रेन और हाइड्रोजन भंडारण सिलेंडरों के डिजाइन से लेकर ईंधन भरने के बुनियादी ढांचे, निगरानी सॉफ्टवेयर और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणालियों तक, हर चरण में सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा गया है। किसी एक सुरक्षा उपाय पर निर्भर रहने के बजाय, भारतीय रेलवे ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत &#8216;गहन सुरक्षा&#8217; के सिद्धांत को अपनाया है, जिसके तहत कई स्वतंत्र सुरक्षा प्रणालियां हाइड्रोजन भंडारण, स्थानांतरण और उपयोग के हर चरण की लगातार निगरानी, ​​सत्यापन और सुरक्षा करती हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हर जगह निगरानी की व्यवस्था है। ट्रेन और संयंत्र में ऐसे उपकरण लगे हैं जो लगातार हाइड्रोजन रिसाव, असामान्य गर्मी, आग की लपटों या धुएं पर नज़र रखते हैं, इसलिए कोई भी समस्या कुछ ही सेकंड में पकड़ में आ जाती है। इसके अलावा, निरंतर वेंटिलेशन से ट्रेन में हवा का प्रवाह बना रहता है, ताकि अगर थोड़ी सी भी हाइड्रोजन लीक हो जाए, तो वह कहीं जमा होने के बजाय सुरक्षित रूप से बाहर निकलकर खुली हवा में घुल जाए।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसमें एक स्वचालित शट-ऑफ सिस्टम भी है। यदि कोई असामान्य स्थिति पाई जाती है, तो सिस्टम किसी व्यक्ति की प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा किए बिना स्वचालित रूप से हाइड्रोजन की आपूर्ति बंद कर सकता है। लोको पायलट की सुरक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। लोको पायलट के केबिन को विशेष रूप से लोको पायलट की सुरक्षा के लिए डिज़ाइन किया गया है, जिसमें एक विशेष मोड है जो आपातस्थिति में ट्रेन को सुरक्षित स्थान पर ले जाने की अनुमति देता है, और एक स्क्रीन है जो लोको पायलट को हर समय पूरे सिस्टम की वास्तविक स्थिति दिखाती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">जिंद हाइड्रोजन संयंत्र में भी इसी तरह की सुरक्षा व्यवस्थाएं हैं, जिनमें रिसाव का पता लगाने वाले उपकरण, आग का पता लगाने वाले उपकरण, स्वचालित शटडाउन सिस्टम, आग पर काबू पाने के लिए पानी के छिड़काव और अग्नि अलार्म शामिल हैं, जो सभी मिलकर काम करते हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">केवल भारतीय रेलवे द्वारा ही नहीं, बल्कि अन्य लोगों द्वारा भी जांच और अनुमोदन किया गया</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाइड्रोजन प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकृत मानकों, जैसे कि एनएफपीए-2 और आईएसओ 19880 श्रृंखला, के अनुसार डिज़ाइन किया गया है, साथ ही यह पेट्रोलियम और विस्फोटक सुरक्षा संगठन (पीईएसओ) की वैधानिक आवश्यकताओं का भी अनुपालन करती है। चालू करने से पहले, संपूर्ण प्रणाली का जर्मनी स्थित टीयूवी एसयूडी द्वारा एक स्वतंत्र तृतीय-पक्ष सुरक्षा मूल्यांकन किया गया, जो विश्व की अग्रणी तकनीकी निरीक्षण और प्रमाणन एजेंसियों में से एक है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">यात्रियों को ले जाने से पहले ट्रेन का परीक्षण किया गया</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस ट्रेन को चलाने की अनुमति मिलने से पहले, यह सुनिश्चित करने के लिए कई कठिन परीक्षणों से गुज़ारा गया कि सब कुछ ठीक से काम कर रहा है। लोड बॉक्स परीक्षण में यह जांचा गया कि विद्युत और पावर सिस्टम वास्तविक भार के तहत सही ढंग से काम करते हैं। रेडियो फ्रीक्वेंसी परीक्षणों से यह सुनिश्चित किया गया कि ट्रेन के इलेक्ट्रॉनिक्स अन्य सिग्नलिंग और संचार प्रणालियों में बाधा न डालें। दोलन परीक्षणों से यह जांचा गया कि ट्रेन बिना अत्यधिक कंपन के, गति पर सुचारू और स्थिर रूप से चलती है। आपातकालीन ब्रेक दूरी परीक्षणों से यह पुष्टि की गई कि आपातस्थिति में ट्रेन कितनी जल्दी और सुरक्षित रूप से रुक सकती है। इन सभी मूल्यांकनों, वैधानिक निरीक्षणों और स्वतंत्र सुरक्षा आकलनों को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद ही परियोजना को परिचालन के लिए तैयार माना गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">वैश्विक स्तर पर भारत की स्थिति क्या है?</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेनें वैश्विक स्तर पर अभी भी प्रारंभिक अवस्था में हैं। जर्मनी व्यावसायिक हाइड्रोजन यात्री ट्रेनों को शुरू करने वाला पहला देश बन गया है, जबकि फ्रांस, इटली, चीन, जापान और कुछ अन्य देश प्रायोगिक परियोजनाओं या सीमित परिचालन पर काम कर रहे हैं। हालांकि, इन ट्रेनों में आमतौर पर दो से चार डिब्बे होते हैं और ये मुख्य रूप से क्षेत्रीय यात्री सेवाओं के लिए ही बनाई गई हैं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारत की हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेनसेट पैमाने और महत्वाकांक्षा दोनों ही दृष्टि से एक महत्वपूर्ण प्रगति का प्रतिनिधित्व करती है। ट्रेन के अलावा, भारत ने जिंद में देश की सबसे बड़ी रेलवे हाइड्रोजन रिफ्यूलिंग सुविधा भी स्थापित की है, जिससे रोलिंग स्टॉक, भंडारण, वितरण अवसंरचना, सुरक्षा प्रणाली और परिचालन प्रोटोकॉल को शामिल करते हुए एक संपूर्ण हाइड्रोजन रेल इकोसिस्&#x200d;टम तंत्र का निर्माण हुआ है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाइड्रोजन ट्रेनों का भविष्य</p>



<p class="wp-block-paragraph">भारतीय रेलवे जिंद- सोनीपत हाइड्रोजन ट्रेन परियोजना से प्राप्त अनुभव का लाभ उठाते हुए कालका-शिमला मार्ग सहित विरासत रेलमार्गों पर हाइड्रोजन प्रौद्योगिकी की तैनाती की संभावनाओं का भी पता लगा रहा है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये पहलें भारतीय रेलवे के एक अग्रणी पायलट प्रोजेक्ट से हाइड्रोजन-संचालित रोलिंग स्टॉक के लिए एक संरचित राष्ट्रीय कार्यक्रम में परिवर्तलन का संकेत देती हैं, जो सतत गतिशीलता में भारत के नेतृत्व को मजबूत करती हैं और साथ ही राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन और देश के दीर्घकालिक नेट जीरो लक्ष्य में योगदान देती हैं।</p>
<p>The post <a href="https://suryodaybharat.com/indias-first-hydrogen-fuel-cell-train-ready-for-sustainable-rail-transport-with-a-capacity-of-approximately-2600-passengers-to-be-inaugurated-on-friday/">भारत की पहली हाइड्रोजन फ्यूल सेल ट्रेन लगभग 2,600 यात्रियों के साथ सतत रेल परिवहन के लिए तैयार, शुक्रवार को उद्धघाटन</a> appeared first on <a href="https://suryodaybharat.com">Suryoday Bharat</a>.</p>
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		<title>भारतीय रेल : नई आईआरसीटीसी वेबसाइट का बीटा वर्जन आज बुधवार रात 9 बजे से लाइव</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 15 Jul 2026 18:07:45 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा : आईआरसीटीसी की वेबसाइट के नए लुक और अनुभव को आजमाने और इसके फीचर्स पर फीडबैक देने के लिए उसकी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन बुधवार रात 9 बजे लॉन्च हुआ है। इसे लिंक पर जाकर देखा जा सकता है। बीटा वर्जन का लिंक मौजूदा वेबसाइट के होमपेज पर भी दिया &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="250" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-15-at-19.47.03-1024x250.jpeg" alt="" class="wp-image-315381" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा : </strong>आईआरसीटीसी की वेबसाइट के नए लुक और अनुभव को आजमाने और इसके फीचर्स पर फीडबैक देने के लिए उसकी नई वेबसाइट का बीटा वर्जन बुधवार रात 9 बजे लॉन्च हुआ है। इसे लिंक पर जाकर देखा जा सकता है। बीटा वर्जन का लिंक मौजूदा वेबसाइट के होमपेज पर भी दिया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">ये सुधार मालवीय नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (एमएनआईटी) के छात्रों ने रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के साथ बातचीत के दौरान सुझाए थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आईआरसीटीसी वेबसाइट पहली बार 2002 में लॉन्च की गई थी और अभी यह हर दिन औसतन लगभग 14.5 लाख टिकटों का काम संभालती है। नई वेबसाइट का यूजर इंटरफेस साफ-सुथरा है और यूजर अनुभव आसान बनाया गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">आईआरसीटीसी ने बीटा वर्जन में चार बड़े सुधार किए हैं:</p>



<p class="wp-block-paragraph">1.⁠ ⁠कैप्चा: कोई अनावश्यक कैप्चा नहीं। कोई अनावश्यक पॉप-अप नहीं। कोई चमकते ग्राफिक्स नहीं। ध्यान भटकाने वाली कोई चीज नहीं।</p>



<p class="wp-block-paragraph">2.⁠ ⁠सीट की उपलब्धता: सभी क्लास में दिखाई देती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">3.⁠ ⁠तेज चेकआउट: बुकिंग के लिए ज़रूरी स्टेप्स की संख्या कम की गई है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">4.⁠ ⁠आसान रिपीट बुकिंग: यात्री की जानकारी सेव रहती है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">डिजाइन की प्रक्रिया में छात्रों को भी शामिल किया गया था, जिन्होंने वेबसाइट के लुक और फील को बेहतर बनाने के लिए सुझाव दिए। प्राप्त फीडबैक के आधार पर, नई वेबसाइट ट्रायल के लिए तैयार है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">बीटा वर्जन से और सुधारों के लिए यूजर फ़ीडबैक मिल सकेगा, जिसे कस्टमर की संतुष्टि बढ़ाने के लिए भविष्य के वर्जन में शामिल किया जाएगा। बहुत जल्द, आईआरसीटीसी वेबसाइट को आने वाले नए पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन के साथ भी जोड़ा जाएगा। चूंकि पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन को भी साथ-साथ अपग्रेड किया जा रहा है, इसलिए पूरी तरह से काम करने वाला नया आईआरसीटीसी पोर्टल कुछ हफ्तों में उपलब्ध हो जाएगा।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इसके साथ ही, आईआरसीटीसी कई ट्रेन बुकिंग ऐप्स को चलाने वाले दशकों पुराने &#8216;पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन&#8217; को अपग्रेड कर रहा है। इसके लिए बहुत ज्यादा काम करना पड़ा क्योंकि अपग्रेडेशन के दौरान भी सिस्टम को चालू रखना जरूरी था। नया &#8216;पैसेंजर रिजर्वेशन इंजन&#8217; जल्द ही लॉन्च किया जाएगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="575" height="1024" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-15-at-22.20.27-575x1024.jpeg" alt="" class="wp-image-315382" style="width:840px;height:auto" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-15-at-22.20.27-575x1024.jpeg 575w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-15-at-22.20.27-168x300.jpeg 168w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-15-at-22.20.27-768x1368.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-15-at-22.20.27-862x1536.jpeg 862w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-15-at-22.20.27.jpeg 898w" sizes="auto, (max-width: 575px) 100vw, 575px" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">हम अपने यूजर्स से नए डिजाइन पर अपने कीमती सुझाव और फीडबैक देने का अनुरोध करते हैं, जिससे हमें आईआरसीटीसी वेबसाइट को और बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।</p>
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		<title>एमडी प्रवीन द्वारा दिए गये एक लाख पोधों के प्लांटेंटेशन हेतु डीएफसीसीआईएल जयपुर द्वारा न्यू अटेली स्टेशन पर वृक्षारोपण</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/tree-plantation-drive-at-new-ateli-station-by-dfccil-jaipur-involving-the-planting-of-100000-saplings-provided-by-md-praveen/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 10 Jul 2026 17:01:08 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, न्यू अटेली, हरियाणा : प्रबंध निदेशक प्रवीन कुमार द्वारा दिए गये एक लाख पोधों के प्लांटेंटेशन हेतु डीएफसीसीआईएल जयपुर यूनिट द्वारा न्यू अटेली स्टेशन पर वृहद वृक्षारोपण हुआ ! पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए डीएफसीसीआईएल, जयपुर यूनिट द्वारा न्यू अटेली स्टेशन पर ‘मास प्लांटेशन अभियान’ के &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/07/WhatsApp-Image-2026-07-10-at-21.35.06-1024x768.jpeg" alt="" class="wp-image-314867" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph"><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, न्यू अटेली, हरियाणा :</strong>  प्रबंध निदेशक प्रवीन कुमार द्वारा दिए गये एक लाख पोधों के प्लांटेंटेशन हेतु डीएफसीसीआईएल जयपुर यूनिट द्वारा न्यू अटेली स्टेशन पर वृहद वृक्षारोपण हुआ ! पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाते हुए डीएफसीसीआईएल, जयपुर यूनिट द्वारा न्यू अटेली स्टेशन पर ‘मास प्लांटेशन अभियान’ के अंतर्गत लगभग 1300 पौधों का वृहद वृक्षारोपण किया गया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">मुख्य महाबप्रबंधक राजेन्द्र चौधरी के निर्देशानुसार टीम को डॉ एस पी पांडे के नेतृत्व में जयपुर यूनिट के सभी ब्रांच ऑफिसर ने अपनी टीम के साथ बढ़चढ़ कर भाग लिया !</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर जेजीएम मैकेनिकल बलबीर लांबा, देवेश मीणा परियोजना प्रबंधक संकेत एवं दूरसंचार, राजनाथ पीएम इलेक्ट्रिक., अरविंद शिवरायण पीएम सिविल एवं परिचालन व व्यवसाय विभाग के एरिया मैनेजर सी. एल. चौधरी, स्टेशन प्रभारी ललित कुमार, एवं न्यू अटेली स्टेशन के सभी कर्मचारी एवं अधिकारी,सर्वोदय विद्यालय के प्रधानाचार्य, शिक्षक, विद्यार्थियों तथा हरियाणा सरकार के वन विभाग के अधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सहभागिता निभाते हुए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।</p>



<p class="wp-block-paragraph">इस अवसर पर सभी ने पौधों के संरक्षण एवं संवर्धन का संकल्प लिया। यह अभियान हरित एवं स्वच्छ पर्यावरण के प्रति डीएफसीसीआईएल की सामाजिक प्रतिबद्धता तथा सतत विकास के संकल्प का सशक्त उदाहरण है।इस अवसर पर करीब 100 लोगों ने भाग लिया !</p>
<p>The post <a href="https://suryodaybharat.com/tree-plantation-drive-at-new-ateli-station-by-dfccil-jaipur-involving-the-planting-of-100000-saplings-provided-by-md-praveen/">एमडी प्रवीन द्वारा दिए गये एक लाख पोधों के प्लांटेंटेशन हेतु डीएफसीसीआईएल जयपुर द्वारा न्यू अटेली स्टेशन पर वृक्षारोपण</a> appeared first on <a href="https://suryodaybharat.com">Suryoday Bharat</a>.</p>
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		<title>आधुनिक तकनीक से खुफिया जानकारी एकत्र करने की प्रक्रिया में सुधार किया जा रहा है : अश्विनी वैष्णव</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/intelligence-gathering-process-being-improved-with-modern-technology-ashwini-vaishnav/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Thu, 21 May 2026 10:44:09 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, सीसीटीवी जैसे नवीनतम तकनीकी उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। रेलगाड़ियों, यात्रियों, स्टेशन परिसर और विशाल रेल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बीट &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="683" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-21-at-16.07.04-1024x683.jpeg" alt="" class="wp-image-312043" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : रेलवे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), ड्रोन, सीसीटीवी जैसे नवीनतम तकनीकी उपकरणों का बड़े पैमाने पर उपयोग कर रहा है। रेलगाड़ियों, यात्रियों, स्टेशन परिसर और विशाल रेल नेटवर्क की सुरक्षा बढ़ाने के लिए यह कार्य मिशन मोड में किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के बीट स्तर पर खुफिया जानकारी जुटाने की व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। गुरुवार नई दिल्ली में आयोजित एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय सुरक्षा समीक्षा बैठक में रेल मंत्रालय ने वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में देश भर के फील्ड अधिकारियों के साथ व्यापक विचार-विमर्श किया। रेल भवन में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने की। रेल राज्य मंत्री वी. सोमन्ना और रवनीत सिंह बिट्टू के अलावा रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष भी इस बैठक में उपस्थित थे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">हाल ही में हुई आगजनी की कुछ घटनाओं सहित कई मामलों की प्रारंभिक जांच में असामाजिक तत्वों की संलिप्तता सामने आई है। भारतीय रेलवे ने इन घटनाओं को गंभीरता से लिया है और रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) इनकी सक्रिय रूप से जांच कर रहा है। कई मामलों में, रेलवे की त्वरित और सक्रिय कार्रवाई से बड़ी दुर्घटनाओं को टालने में मदद मिली है। खुफिया प्रणालियों को मजबूत करने और सूचनाओं को तेजी से संसाधित करने के लिए प्रौद्योगिकी के उपयोग के अलावा, रेलवे मंत्रालय यात्रियों को यात्रा के दौरान और स्टेशन परिसर में प्रतीक्षा करते समय असामाजिक गतिविधियों को रोकने के प्रयासों में सक्रिय रूप से सहयोग करने के लिए भी प्रोत्साहित करेगा। रेलवे ने यात्रियों से यात्रा के दौरान सतर्क और सावधान रहने का आग्रह किया है। रेलवे परिसर में किसी भी संदिग्ध गतिविधि या संदिग्ध व्यक्ति को देखने पर तुरंत रेलवे हेल्पलाइन नंबर 139 पर सूचना देने को कहा गया है।</p>



<p class="wp-block-paragraph">सुरक्षा समीक्षा बैठक के दौरान हुई चर्चाओं में, बेहतर रिपोर्टिंग प्रणाली के माध्यम से जमीनी स्तर से खुफिया जानकारी जुटाने की प्रक्रिया को मजबूत करने पर बल दिया गया। प्रौद्योगिकी आधारित सुरक्षा प्रणालियों को बेहतर बनाने, रेलवे नेटवर्क में सीसीटीवी कवरेज का विस्तार करने और रेलवे बोर्ड मुख्यालय तथा फील्ड जोन के बीच परिचालन सुरक्षा तालमेल को सुधारने पर भी बल दिया गया। बैठक में साइबर सुरक्षा को मजबूत करने, कैमरों की विशिष्टताओं को उन्नत करने और एआई-आधारित निगरानी प्रणालियों को तैनात करने पर भी विचार किया गया। बैठक में रेलवे नेटवर्क में अधिक प्रभावी सुरक्षा प्रबंधन के लिए आरपीएफ और सरकारी रेलवे पुलिस (जीआरपी) के बीच सूचना साझाकरण तंत्र को बेहतर बनाकर आपसी तालमेल को मजबूत करने पर भी ध्यान केंद्रित किया गया।</p>
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		<title>रेलवे स्वास्थ्य सेवाओं में उपचार प्रक्रिया होगी पूरी तरह डिजिटल एवं पेपरलेस</title>
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		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 03 May 2026 17:11:20 +0000</pubDate>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / लखनऊ : रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत रेलवे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, त्वरित एवं पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों, पेंशनभोगियों एवं उनके आश्रितों को कागजी औपचारिकताओं से मुक्त कर बेहतर एवं सहज &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/05/WhatsApp-Image-2026-05-03-at-21.25.01.jpeg" alt="" class="wp-image-310900" /></figure>



<p class="wp-block-paragraph">सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / लखनऊ : रेलवे बोर्ड द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अंतर्गत रेलवे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक सरल, पारदर्शी, त्वरित एवं पूर्णतः डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। नई व्यवस्था का उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों, पेंशनभोगियों एवं उनके आश्रितों को कागजी औपचारिकताओं से मुक्त कर बेहतर एवं सहज स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना है। नई नीति के अनुसार अब रेलवे अस्पतालों एवं हेल्थ यूनिट्स में उपचार, दवा वितरण तथा रेफरल संबंधी प्रक्रियाएं चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह पेपरलेस की जाएंगी। मरीजों को केवल अपना UMID (उम्मीद) कार्ड एवं HMIS में पंजीकृत मोबाइल नंबर साथ रखना होगा। डॉक्टर द्वारा HMIS प्रणाली में दवा दर्ज किए जाने के बाद मरीज सीधे फार्मेसी से UMID नंबर के माध्यम से दवा प्राप्त कर सकेंगे।</p>



<p class="wp-block-paragraph">रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नई व्यवस्था में डिजिटल रेफरल प्रणाली को भी और अधिक सुदृढ़ बनाया गया है। सामान्य परिस्थितियों में रेलवे चिकित्सक द्वारा रेफर किए गए मरीज सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में UMID एवं OTP आधारित सत्यापन के माध्यम से उपचार प्राप्त कर सकेंगे। वहीं आपातकालीन परिस्थितियों में मरीज बिना पूर्व रेफरल के भी सूचीबद्ध अस्पतालों में उपचार प्रारंभ करा सकेंगे, जिसकी सूचना अस्पताल द्वारा निर्धारित समयावधि में HMIS पोर्टल पर उपलब्ध कराई जाएगी। वरिष्ठ नागरिकों एवं पेंशनभोगियों को भी नई व्यवस्था में विशेष सुविधाएं प्रदान की गई हैं। </p>



<p class="wp-block-paragraph">70 वर्ष से अधिक आयु के RELHS लाभार्थियों को सूचीबद्ध निजी अस्पतालों में कैशलेस OPD एवं जांच सुविधा उपलब्ध होगी, बशर्ते वे फिक्स्ड मेडिकल अलाउंस प्राप्त न कर रहे हों। इसके अतिरिक्त अब अलग से RELHS कार्ड की आवश्यकता नहीं होगी तथा केवल UMID कार्ड के माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लिया जा सकेगा। कैंसर एवं ट्रांसप्लांट जैसे गंभीर रोगों के उपचार हेतु भी व्यापक डिजिटल रेफरल व्यवस्था लागू की गई है, जिससे मरीजों को बार-बार रेफरल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। रेलवे द्वारा टाटा मेमोरियल सेंटर सहित विभिन्न सूचीबद्ध संस्थानों में डिजिटल माध्यम से उपचार सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।</p>



<p class="wp-block-paragraph">नई नीति के अंतर्गत निजी अस्पतालों के बिल भुगतान की प्रक्रिया भी HMIS आधारित डिजिटल प्रणाली से की जाएगी। साथ ही मरीज HMIS एप्प के माध्यम से उपचार संबंधी फीडबैक एवं रेटिंग भी दे सकेंगे, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में निरंतर सुधार सुनिश्चित किया जा सकेगा। रेलवे बोर्ड की यह पहल “एक रेलवे – एक कार्ड” की अवधारणा पर आधारित है, जिसका उद्देश्य रेलवे स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक आधुनिक, पारदर्शी, सरल एवं जनहितकारी बनाना है।</p>
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