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	<title>पंजाब Archives - Suryoday Bharat</title>
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		<title>उत्तर रेलवे महाप्रबंधक द्वारा अमृतसर – जालंधर – लुधियाना रेल खंड एवं यात्री सुविधाओं &#8211; संरक्षा निरीक्षण</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/amritsar-jalandhar-ludhiana-railway-section-and-passenger-facilities-safety-inspection-by-the-general-manager-of-northern-railway/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Wed, 08 Apr 2026 03:01:44 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / अमृतसर : उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पाण्डेय द्वारा मंगलवार अमृतसर–जालंधर–लुधियाना रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न रेलवे स्टेशनों एवं संबंधित अवसंरचना का गहन निरीक्षण कर यात्री सुविधाओं, स्वच्छता, संरक्षा व्यवस्थाओं तथा परिचालन दक्षता की समीक्षा की। महाप्रबंधक उत्तर रेलवे ने अमृतसर रेलवे &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img fetchpriority="high" decoding="async" width="684" height="1024" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.41.14-684x1024.jpeg" alt="" class="wp-image-309533" style="width:840px;height:auto" /></figure>



<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / अमृतसर : उत्तर रेलवे के महाप्रबंधक राजेश कुमार पाण्डेय द्वारा मंगलवार अमृतसर–जालंधर–लुधियाना रेलखंड का विस्तृत निरीक्षण किया गया। इस दौरान उन्होंने विभिन्न रेलवे स्टेशनों एवं संबंधित अवसंरचना का गहन निरीक्षण कर यात्री सुविधाओं, स्वच्छता, संरक्षा व्यवस्थाओं तथा परिचालन दक्षता की समीक्षा की।</p>



<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img decoding="async" width="684" height="1024" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.11-684x1024.jpeg" alt="" class="wp-image-309534" style="width:840px;height:auto" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.11-684x1024.jpeg 684w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.11-200x300.jpeg 200w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.11-768x1151.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.11-1025x1536.jpeg 1025w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.11.jpeg 1068w" sizes="(max-width: 684px) 100vw, 684px" /></figure>



<p>महाप्रबंधक उत्तर रेलवे ने अमृतसर रेलवे स्टेशन की रिडेवलपमेंट कार्यों का निरीक्षण कर उनकी प्रगति की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने वेटिंग हॉल, बुकिंग कार्यालय, आरक्षण कार्यालय, पार्किंग व्यवस्था, सर्कुलेटिंग एरिया तथा स्टेशन की सेकेंड एंट्री सहित विभिन्न यात्री सुविधाओं का व्यापक अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान महाप्रबंधक ने यात्रियों की सुविधा एवं पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा देने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को कार्यों की गुणवत्ता एवं समयबद्ध पूर्णता सुनिश्चित करने पर विशेष बल दिया।</p>



<p>महाप्रबंधक, द्वारा ब्यास रेलवे स्टेशन पर प्रस्तावित रिडेवलपमेंट कार्यों की समीक्षा की गई। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विभिन्न यात्री सुविधाओं का जायजा लेते हुए कार्यों की प्रगति का आकलन किया। इस अवसर पर डेरा राधा स्वामी सत्संग ब्यास की प्रबंधन समिति के सदस्यगण भी उपस्थित रहे।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img decoding="async" width="1024" height="684" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.12-1024x684.jpeg" alt="" class="wp-image-309535" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.12-1024x684.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.12-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.12-768x513.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.12-1536x1025.jpeg 1536w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.12.jpeg 1600w" sizes="(max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>महाप्रबंधक द्वारा जालंधर सिटी रेलवे स्टेशन पर प्रस्तावित रिडेवलपमेंट कार्यों की समीक्षा की गई। इस दौरान उन्होंने स्टेशन पर उपलब्ध विभिन्न यात्री सुविधाओं का निरीक्षण करते हुए चल रहे कार्यों की प्रगति का विस्तृत आकलन किया तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी प्रदान किए। जालंधर छावनी रेलवे स्टेशन के प्रमुख विकास कार्य पूर्ण हो चुके हैं। इसी क्रम में महाप्रबंधक, उत्तर रेलवे द्वारा स्टेशन पर रिडेवलपमेंट कार्यों का अवलोकन किया गया तथा कार्यों की गुणवत्ता और प्रगति का जायजा लिया गया।</p>



<p>निरीक्षण के दौरान मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार सहित वरिष्ठ अधिकारी एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे ।<br>महाप्रबंधक ने सभी अधिकारियों एवं कर्मचारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए सेवा गुणवत्ता में निरंतर सुधार हेतु प्रेरित किया तथा महाप्रबंधक ने यात्रियों को सुरक्षित, बेहतर और सुगम रेल सेवाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="684" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.13-1024x684.jpeg" alt="" class="wp-image-309536" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.13-1024x684.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.13-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.13-768x513.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.13-1536x1025.jpeg 1536w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/04/WhatsApp-Image-2026-04-07-at-20.32.13.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>महाप्रबंधक ने अधिकारियों के साथ बैठक में विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति पर विस्तार से चर्चा करते हुए सभी कार्यों को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।</p>
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		<title>रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह ने तख्त श्री दमदमा साहिब के लिए ऐतिहासिक तलवंडी साबो रेल लिंक को मंजूरी दी</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/minister-of-state-for-railways-ravneet-singh-approves-historic-talwandi-sabo-rail-link-to-takht-sri-damdama-sahib/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 21 Mar 2026 05:45:45 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / बठिंडा : शुक्रवार तलवंडी साबो के लिए रेलवे लिंक को मंजूरी मिलने के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। यह पवित्र भूमि तख्त श्री दमदमा साहिब की है, जो सिख धर्म के पाँच तख्तों में से एक है।इस अवसर को साझा करते हुए गर्व व्यक्त करते हुए, &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="576" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-20-at-21.33.21-1024x576.jpeg" alt="" class="wp-image-308423" /></figure>



<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली / बठिंडा : शुक्रवार तलवंडी साबो के लिए रेलवे लिंक को मंजूरी मिलने के साथ एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल हुई है। यह पवित्र भूमि तख्त श्री दमदमा साहिब की है, जो सिख धर्म के पाँच तख्तों में से एक है।<br>इस अवसर को साझा करते हुए गर्व व्यक्त करते हुए, केंद्रीय रेल एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री, रवनीत सिंह ने बठिंडा में घोषणा की कि यह परियोजना केवल एक रेलवे लाइन नहीं है—यह आस्था, गर्व और पंजाब के लिए लंबे समय से लंबित न्याय का प्रतीक है। इस विकास के साथ, तख्त श्री दमदमा साहिब अब अन्य चार तख्तों से रेलवे द्वारा जुड़ जाएगा, जो धार्मिक और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।</p>



<p>रमन मंडी–सद्दा सिंहवाला नई ब्रॉड गेज रेल लाइन परियोजना, मानसा–बठिंडा डबलिंग परियोजना के अंतर्गत एक प्रमुख बुनियादी ढांचा पहल है। 42.9 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की कुल लागत ₹ 1118.47 करोड़ होगी, जबकि प्रति किलोमीटर लागत ₹ 26.07 करोड़ है। यह परियोजना मानसा और बठिंडा जिलों को कवर करेगी और क्षेत्रीय विकास एवं परिवहन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।</p>



<p>इस परियोजना के लिए कुल 192.42 हेक्टेयर भूमि की आवश्यकता होगी, जिसमें मानसा जिले में 40.508 हेक्टेयर और बठिंडा जिले में 151.912 हेक्टेयर भूमि शामिल है। परियोजना के अंतर्गत कुल 6 स्टेशन बनाए जाएंगे—2 मौजूदा और 4 नए स्टेशन: लालेआना, तलवंडी साबो, जगा राम तीर्थ, कमालू सवाइच, तथा कमालू सवाइच में एक जंक्शन केबिन।</p>



<p>यह रेलवे लाइन पूरी तरह से लेवल क्रॉसिंग मुक्त होगी और इसमें 2 प्रमुख पुल, 1 अतिरिक्त प्रमुख पुल घटक, 56 छोटे पुल तथा 55 रोड अंडर ब्रिज (RUBs) शामिल होंगे। इसके साथ ही इसमें 2&#215;25 केवी इलेक्ट्रिक ट्रैक्शन और आधुनिक MACLS-III सिग्नलिंग प्रणाली लगाई जाएगी।</p>



<p>अपने संबोधन में रवनीत सिंह ने पंजाब की पूर्व सरकारों पर सवाल उठाते हुए कहा कि दशकों तक कांग्रेस, उसके बाद आम आदमी पार्टी (AAP) और शिरोमणि अकाली दल ने शासन किया, लेकिन उन्होंने न तो सार्थक बुनियादी ढांचा विकास किया और न ही सिख विरासत का उचित सम्मान किया। उन्होंने कहा कि इन दलों ने आस्था और भावनाओं का राजनीतिक लाभ के लिए उपयोग किया, लेकिन ठोस कार्य नहीं किए—जैसे कि पाँचों तख्तों को रेल मार्ग से जोड़ना।</p>



<p>उन्होंने अंत में वर्तमान नेतृत्व, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में सिख आस्था का सम्मान विकास और बुनियादी ढांचे के माध्यम से किया जा रहा है, जिससे लोगों की लंबे समय से लंबित मांगें पूरी हो रही हैं।</p>
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		<title>अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर “फिरोजपुर मंडल के जलंधर सिटी रेलवे स्टेशन पर कार्यक्रमों का आयोजन “</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/programs-organized-at-jalandhar-city-railway-station-of-firozpur-division-on-international-womens-day/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sun, 08 Mar 2026 12:53:59 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[दिल्ली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[रोजगार]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : भारतीय रेल, महिला यात्रियों तथा अपनी महिला कर्मचारियों के लिए विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियाँ संचालित करती है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रेल द्वारा अनेक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। ट्रेनों में महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित एवं निचली बर्थ &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.27-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-307904" /></figure>



<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, नई दिल्ली : भारतीय रेल, महिला यात्रियों तथा अपनी महिला कर्मचारियों के लिए विभिन्न कल्याणकारी गतिविधियाँ संचालित करती है। महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से भारतीय रेल द्वारा अनेक सुविधाएँ उपलब्ध कराई जा रही हैं। ट्रेनों में महिलाओं, वरिष्ठ नागरिकों तथा गर्भवती महिलाओं के लिए आरक्षित एवं निचली बर्थ की विशेष व्यवस्था है। इसके अतिरिक्त कई स्टेशनों पर महिलाओं के लिए अलग आरक्षण काउंटर, प्रतीक्षालय और शौचालय की सुविधा उपलब्ध है। मेल/एक्सप्रेस ट्रेनों के अनारक्षित डिब्बों में भी महिलाओं के लिए अलग स्थान निर्धारित किया गया है।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.29-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-307905" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.29-1024x682.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.29-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.29-768x512.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.29-1536x1023.jpeg 1536w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.29.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>महिला कर्मचारियों के कल्याण के लिए भारतीय रेल द्वारा बाल देखभाल (क्रेच) सुविधा, प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा छात्रवृत्ति जैसी योजनाएँ संचालित की जा रही हैं। रविवार जालंधर सिटी स्टेशन पर बुकिंग, सुरक्षा, सिग्नलिंग तथा ट्रैक मेंटेनेंस सहित सभी परिचालन और रखरखाव संबंधी कार्य पूर्णतः महिला कर्मचारियों द्वारा संचालित किए गए। इसके अलावा जलंधर सिटी से फिरोजपुर कैंट के बीच चली रेलगाड़ी संख्या 54643 का परिचालन पूरी तरह महिला रेलकर्मियों के जिम्मे रहा। ट्रेन संख्या 54643 को महिला पॉइंट्समैन द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। इस अवसर पर, जलंधर सिटी रेलवे स्टेशन पर बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्रियों पर रोक लगाने के उद्देश्य से “फोर्ट्रेस टिकट जांच” अभियान चलाया गया जो पूरी तरह महिला टिकट चेकिंग स्टाफ द्वारा किया गया। इस विशेष अभियान के दौरान कुल 220 बिना टिकट यात्रियों को पकड़ा गया, जिनसे ₹ 1,11,000/- का राजस्व वसूला गया।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="682" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.28-1024x682.jpeg" alt="" class="wp-image-307906" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.28-1024x682.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.28-300x200.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.28-768x512.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.28-1536x1023.jpeg 1536w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-08-at-16.18.28.jpeg 1600w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>रविवार अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मंडल रेल प्रबंधक संजीव कुमार ने महिला कर्मचारियों को बधाई दी और उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने आगे बताया कि भविष्य में युवा लड़कियों को रेलवे में करियर बनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से अब एक पहल की गई, विभिन्न स्कूलों से आई हुई छात्राओं को दिखाया गया कि महिलाएँ स्टेशन संचालन का नेतृत्व कर रही हैं, ट्रेनें चला रही हैं, लोको और पटरियों के रखरखाव का कार्य भी संभाल रही हैं। फिरोजपुर मंडल रेलवे महिला यात्रियों के सौहार्दपूर्ण एवं अनुकूल कार्यस्थल उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है।</p>
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		<title>&#8220;महिला दिवस विशेष&#8221; सपनों की उड़ान : शिक्षिका और लेखिका डॉ. प्रियंका सौरभ</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/womens-day-special-flight-of-dreams-teacher-and-writer-dr-priyanka-saurabh/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 06 Mar 2026 15:01:17 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादकीय]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>✍️ डॉ. विजय गर्ग : समाज के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जहाँ स्त्रियों ने सीमित संसाधनों और अनेक सामाजिक बंधनों के बावजूद अपने साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प से जीवन की नई दिशाएँ तय की हैं। स्त्री केवल परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशील चेतना भी है। जब एक &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="521" height="1024" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-06-at-18.20.43-521x1024.jpeg" alt="" class="wp-image-307740" style="width:840px;height:auto" /></figure>



<p><strong><img src="https://s.w.org/images/core/emoji/17.0.2/72x72/270d.png" alt="✍" class="wp-smiley" style="height: 1em; max-height: 1em;" /> डॉ. विजय गर्ग : </strong>समाज के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण मिलते हैं जहाँ स्त्रियों ने सीमित संसाधनों और अनेक सामाजिक बंधनों के बावजूद अपने साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प से जीवन की नई दिशाएँ तय की हैं। स्त्री केवल परिवार की धुरी ही नहीं, बल्कि समाज की संवेदनशील चेतना भी है। जब एक स्त्री अपने भीतर की शक्ति को पहचान लेती है, तो वह केवल अपने जीवन को ही नहीं, बल्कि पूरे समाज को प्रेरित करने का सामर्थ्य रखती है। ऐसी ही प्रेरक कहानी है शिक्षिका, लेखिका और संवेदनशील विचारक डॉ. प्रियंका सौरभ की, जिनकी जीवन यात्रा संघर्ष, साधना और सृजन का सुंदर संगम है।</p>



<p>हरियाणा के हिसार जिले के आर्यनगर गाँव के साधारण ग्रामीण परिवेश में जन्मी डॉ. प्रियंका सौरभ का बचपन सामान्य परिस्थितियों में बीता। उनके जीवन में न तो विशेष संसाधन थे और न ही कोई विशेष सुविधा। लेकिन उनके भीतर शिक्षा प्राप्त करने और जीवन में कुछ सार्थक करने की गहरी इच्छा अवश्य थी। यही इच्छा आगे चलकर उनके संकल्प की शक्ति बन गई।</p>



<p>उनकी शिक्षा-यात्रा के दौरान ही जीवन ने एक बड़ा मोड़ लिया जब स्नातक की पढ़ाई के दौरान उनका विवाह हो गया। विवाह के बाद उनके सामने पत्नी, बहू और बाद में माँ की जिम्मेदारियाँ आ खड़ी हुईं। अक्सर भारतीय समाज में ऐसे अवसर पर लड़कियों की शिक्षा और उनके सपने पीछे छूट जाते हैं। घर-परिवार की जिम्मेदारियाँ ही उनका प्रमुख कार्यक्षेत्र बन जाती हैं। लेकिन डॉ. प्रियंका सौरभ ने परिस्थितियों को अपनी सीमाएँ बनने नहीं दिया। उन्होंने अपने जीवन की चुनौतियों को स्वीकार किया, लेकिन अपने सपनों को कभी त्यागा नहीं।</p>



<p>विवाह और पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ-साथ उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। यह कार्य आसान नहीं था। सीमित समय, घरेलू कार्यों का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएँ—इन सबके बीच शिक्षा की राह पर आगे बढ़ना किसी तपस्या से कम नहीं था। लेकिन दृढ़ इच्छाशक्ति और निरंतर परिश्रम के बल पर उन्होंने राजनीति विज्ञान में डबल एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने एम.फिल की पढ़ाई पूरी की और आगे पीएच.डी. के शोध कार्य की दिशा में भी निरंतर प्रयासरत रहीं।</p>



<p>उनकी शैक्षणिक उपलब्धियाँ केवल डिग्रियों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह उस संघर्ष और समर्पण का परिणाम हैं जिसने हर कठिनाई को चुनौती दी। जीवन की इसी निरंतर साधना ने उन्हें सरकारी सेवा के क्षेत्र में भी सफलता दिलाई। पाँच बार सरकारी सेवा में चयनित होना किसी भी व्यक्ति के लिए बड़ी उपलब्धि है। यह उनके अथक प्रयास, आत्मविश्वास और लक्ष्य के प्रति समर्पण का प्रमाण है। अंततः उन्होंने हरियाणा शिक्षा विभाग में प्रवक्ता के रूप में अपनी पहचान स्थापित की।</p>



<p>एक शिक्षिका के रूप में डॉ. प्रियंका सौरभ केवल पाठ्यक्रम पढ़ाने तक सीमित नहीं रहतीं। वे अपने विद्यार्थियों के भीतर आत्मविश्वास, संवेदनशीलता और सकारात्मक सोच का बीज बोने का प्रयास करती हैं। उनके लिए शिक्षा केवल ज्ञान प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण की प्रक्रिया है। वे विद्यार्थियों को यह समझाने का प्रयास करती हैं कि जीवन में सफलता केवल अंकों या डिग्रियों से नहीं मिलती, बल्कि मेहनत, अनुशासन और निरंतर सीखने की इच्छा से मिलती है।</p>



<p>शिक्षण कार्य के साथ-साथ डॉ. प्रियंका सौरभ ने साहित्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। उनके लिए लेखन केवल एक शौक नहीं, बल्कि जीवन की अभिव्यक्ति का माध्यम है। जब भी उन्हें समय मिलता, वे अपने अनुभवों, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों को शब्दों में ढालने का प्रयास करतीं। धीरे-धीरे यह प्रयास एक सशक्त साहित्यिक यात्रा में बदल गया।</p>



<p>उनकी रचनाओं में स्त्री जीवन की संवेदनाएँ, सामाजिक विसंगतियाँ, मानवीय संबंधों की जटिलताएँ और जीवन के छोटे-छोटे अनुभवों की गहरी अनुभूति देखने को मिलती है। वे केवल कल्पना के संसार में नहीं रहतीं, बल्कि समाज के वास्तविक अनुभवों को अपनी लेखनी का आधार बनाती हैं।</p>



<p>उनका काव्य संग्रह “दीमक लगे गुलाब” रिश्तों की उन अदृश्य दरारों को उजागर करता है जो अक्सर दिखाई नहीं देतीं, लेकिन धीरे-धीरे संबंधों को भीतर से कमजोर कर देती हैं। इसी तरह “चूल्हे से चाँद तक” स्त्री जीवन के संघर्ष, सपनों और आकांक्षाओं की यात्रा को दर्शाता है। यह संग्रह बताता है कि स्त्री की दुनिया केवल घर की चारदीवारी तक सीमित नहीं है; उसके सपने आकाश की ऊँचाइयों तक पहुँच सकते हैं।</p>



<p>“मौन की मुस्कान” उनकी एक और महत्वपूर्ण कृति है जिसमें उन चुप्पियों को आवाज़ दी गई है जिन्हें स्त्रियाँ अक्सर अपने भीतर ही समेट लेती हैं। यह संग्रह पाठकों को यह सोचने पर मजबूर करता है कि समाज में कितनी ही भावनाएँ और पीड़ाएँ ऐसी होती हैं जिन्हें शब्द नहीं मिल पाते।</p>



<p>बाल साहित्य के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्वपूर्ण कार्य किया है। “परियों से संवाद” और “बच्चों की दुनिया” जैसी कृतियाँ बच्चों की कल्पनाशीलता, जिज्ञासा और संवेदनशीलता को अभिव्यक्त करती हैं। इन रचनाओं में बालमन की सहजता और सरलता को बहुत सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया है।</p>



<p>निबंध लेखन के क्षेत्र में उनका संग्रह “समय की रेत पर” विशेष रूप से उल्लेखनीय है। इसमें उन्होंने सामाजिक परिवर्तनों, महामारी के दौर में मानव मनोविज्ञान और समाज में बदलती संवेदनाओं पर विचारपूर्ण लेख प्रस्तुत किए हैं।</p>



<p>इसी प्रकार “निर्भयें” स्त्री साहस और आत्मसम्मान की प्रेरक कहानियों का संग्रह है। यह कृति बताती है कि स्त्री यदि अपने भीतर के साहस को पहचान ले, तो वह किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकती है। अंग्रेज़ी निबंध संग्रह “Fearless” में भी उन्होंने भारतीय स्त्री जीवन की शक्ति और संघर्ष को वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत किया है।</p>



<p>लघुकथा संग्रह “आँचल की चुप्पी” स्त्री मन की सूक्ष्म संवेदनाओं को बहुत मार्मिक ढंग से सामने लाता है। वहीं “खिड़की से झांकती ज़िंदगी” रोज़मर्रा के जीवन के अनुभवों को संवेदनशील दृष्टि से देखने का प्रयास है। इन सभी कृतियों के माध्यम से उन्होंने यह सिद्ध किया है कि साहित्य केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने वाला माध्यम भी है।</p>



<p>डॉ. प्रियंका सौरभ की लेखनी का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह है कि वे समाज के उन विषयों को भी उठाती हैं जिन पर अक्सर कम चर्चा होती है। वे दिव्यांग बच्चों की समस्याओं, बुज़ुर्गों की उपेक्षा, शिक्षकों के मानसिक दबाव और समाज में बढ़ती संवेदनहीनता जैसे विषयों पर गंभीरता से लिखती हैं। उनकी रचनाएँ पाठकों को केवल पढ़ने के लिए नहीं, बल्कि सोचने के लिए प्रेरित करती हैं।</p>



<p>उनकी साहित्यिक यात्रा में अब तक दस से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं और विभिन्न समाचार पत्रों तथा पत्रिकाओं में उनके दस हजार से अधिक लेख प्रकाशित हो चुके हैं। यह संख्या केवल एक आँकड़ा नहीं, बल्कि उनके निरंतर लेखन और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रमाण है।</p>



<p>साहित्य और समाज के क्षेत्र में उनके योगदान को अनेक संस्थाओं ने सम्मानित भी किया है। उन्हें आईपीएस मानव पुरस्कार, नारी रत्न, सुपर वुमन अवार्ड तथा कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। हालांकि उनके लिए सबसे बड़ा सम्मान पाठकों का विश्वास और प्रेम है।</p>



<p>डॉ. प्रियंका सौरभ का जीवन यह सिखाता है कि संघर्ष जीवन का अंत नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत हो सकता है। यदि व्यक्ति अपने लक्ष्य के प्रति ईमानदार हो और निरंतर प्रयास करता रहे, तो कोई भी बाधा उसे आगे बढ़ने से नहीं रोक सकती।</p>



<p>आज जब समाज तेजी से बदल रहा है और जीवन की भागदौड़ में संवेदनाएँ कहीं खोती हुई दिखाई देती हैं, ऐसे समय में उनकी लेखनी हमें मानवीय मूल्यों की याद दिलाती है। वे यह संदेश देती हैं कि जीवन की सच्ची सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों में नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपने दायित्व को निभाने में भी होती है।</p>



<p>महिला दिवस के इस विशेष अवसर पर डॉ. प्रियंका सौरभ की यह यात्रा हमें यह प्रेरणा देती है कि स्त्री यदि अपने भीतर की शक्ति को पहचान ले, तो वह अपने जीवन की दिशा स्वयं तय कर सकती है। वह केवल अपने परिवार का आधार ही नहीं, बल्कि समाज की चेतना भी बन सकती है।</p>



<p>उनकी कहानी हमें यह विश्वास दिलाती है कि सपने परिस्थितियों के मोहताज नहीं होते। यदि मन में दृढ़ संकल्प हो और प्रयास निरंतर हो, तो हर सपना एक दिन साकार हो सकता है।</p>



<p>डॉ. प्रियंका सौरभ की यह यात्रा न केवल एक स्त्री की उपलब्धि की कहानी है, बल्कि उन सभी महिलाओं के संघर्ष और संकल्प का प्रतीक है जो घर और समाज की जिम्मेदारियों के बीच अपने सपनों को जीवित रखती हैं। यही उनकी सबसे बड़ी पहचान और सबसे बड़ी प्रेरणा है।</p>



<p>( ; सेवानिवृत्त प्राचार्य, शैक्षिक स्तंभकार एवं प्रख्यात शिक्षाविद, मलोट, पंजाब )</p>
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		<item>
		<title>आईआईएसईआर एप्टीट्यूड टेस्ट (आईएटी) 2026 का रजिस्ट्रेशन 5 मार्च से शुरू : परीक्षा 7 जून को होगी</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/iiser-aptitude-test-iat-2026-registration-starts-from-march-5-exam-will-be-held-on-june-7/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Tue, 03 Mar 2026 13:02:16 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चंडीगढ़ : इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) ने आईआईएसईआर एप्टीट्यूड टेस्ट (आईएटी) 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आईएटी शैक्षिक वर्ष 2026-27 के लिए सभी आईआईएसईआर कैंपस के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश के लिए एकमात्र और अनिवार्य परीक्षा है। ऑनलाइन आवेदन की आरंभिक तिथि 5 मार्च, 2026 &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img decoding="async" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-03-at-17.20.29.jpeg" alt="" class="wp-image-307574" style="width:840px;height:auto" /></figure>



<p><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, चंडीगढ़ :</strong> इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) ने आईआईएसईआर एप्टीट्यूड टेस्ट (आईएटी) 2026 के लिए आवेदन आमंत्रित किए हैं। आईएटी शैक्षिक वर्ष 2026-27 के लिए सभी आईआईएसईआर कैंपस के अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम में प्रवेश के लिए एकमात्र और अनिवार्य परीक्षा है।</p>



<p>ऑनलाइन आवेदन की आरंभिक तिथि 5 मार्च, 2026 (गुरुवार) है और एप्टीट्यूड टेस्ट 7 जून, 2026 (रविवार) को होगा।<br>विज्ञान पढ़ने के इच्छुक उम्मीदवार इस अनिवार्य एप्टीट्यूड टेस्ट के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। इस परीक्षा से सभी 7 आईआईएसईआर कैंपस में किसी में भी विश्वस्तरीय शोध एवं प्रशिक्षण का प्रवेश द्वार खुल जाएगा। आईआईएसईआर की स्थापना भारत सरकार ने उच्च गुणवत्ता के साथ आधारभूत विज्ञान की शिक्षा और शोध संवर्धन के लिए किया। </p>



<p>आईआईएसईआर बरहामपुर, आईआईएसईआर भोपाल, आईआईएसईआर कोलकाता, आईआईएसईआर मोहाली, आईआईएसईआर पुणे, आईआईएसईआर तिरुवनंतपुरम और आईआईएसईआर तिरुपति- किसी भी आईआईएसईआर में प्रवेश के इच्छुक उम्मीदवार ऑफिशियल वेबसाइट https://www.iiseradmission.in/ पर साल 2026 के लिए रजिस्टर कर सकते हैं। वेबसाइट पर परीक्षा केंद्र के विवरण भी दिए जाएँगे।</p>



<figure class="wp-block-image size-full is-resized"><img loading="lazy" decoding="async" width="694" height="868" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-03-at-17.20.29-1.jpeg" alt="" class="wp-image-307575" style="width:840px;height:auto" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-03-at-17.20.29-1.jpeg 694w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/03/WhatsApp-Image-2026-03-03-at-17.20.29-1-240x300.jpeg 240w" sizes="auto, (max-width: 694px) 100vw, 694px" /></figure>



<p>आईएटी 2026 की पूरी प्रवेश प्रक्रिया में उम्मीदवारों की सहायता के लिए एक हेल्पडेस्क (टेली. $91 7205457461 (कार्य दिवस में दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे के बीच); ईमेल: askjac2026@iiserbpr.ac.in) का प्रावधान किया गया है।<br>आईआईएसईआर के प्लेसमेंट रिकॉर्ड बहुत अच्छे रहे हैं। पूरी दुनिया के टॉप ग्लोबल फर्मों, रिसर्च इंस्टिट्यूशन्स और पीएचडी प्रोग्राम्स में आईआईएसईआर के ग्रेजुएट्स अपनी जगह बना रहे हैं। </p>



<p>आईएटी 2026 के लिए योग्यता मानक<br>आईआईएसईआर एप्टीट्यूड टेस्ट (आईएटी) 2026 में आवेदन के लिए उम्मीदवार का साइंस स्ट्रीम में कक्षा 12 / समकक्ष परीक्षा या न्यूनतम 3 साल का डिप्लोमा प्रोग्राम (2024, 2025 या 2026 में) न्यूनतम 60 प्रतिशत अंकों (एससी / एसटी / पीडब्ल्यू के लिए 55 प्रतिशत) के साथ पास होना अनिवार्य है। उम्मीदवार ने बायोलॉजी, केमिस्ट्री, मैथमेटिक्स और फिजिक्स में से कम से कम तीन विषयों की पढ़ाई की हो। आईआईएसईआर कोलकाता के बीएस-एमएस कम्प्यूटेशनल और डेटा साइंस प्रोग्राम, आईआईएसईआर भोपाल के बी.टेक / बीएस इकोनॉमिक साइंस प्रोग्राम और आईआईएसईआर तिरुपति के बीएस इकोनॉमिक और स्टैटिस्टिकल साइंस प्रोग्राम के लिए मैथमेटिक्स अनिवार्य है।</p>



<p>विशेष सूचना- दिसंबर 2023 के जेकेबीओएसई कश्मीर / लद्दाख के विद्यार्थियों को 2024 में पास माना जाएगा; कश्मीरी माइग्रेंट्स अपने डोमिसाइल सर्टिफिकेट अपलोड करें; आरक्षण भारत सरकार की नीतियों के अनुसार उपलब्ध हैं। (एससी 15 प्रतिशत, एसटी 7.5 प्रतिशत, ओबीसी-एनसीएल 27 प्रतिशत, पीडब्ल्यूडी 5 प्रतिशत, ईडब्ल्यूएस 10 प्रतिशत तक, कश्मीरी माइग्रेंट्स के लिए सुपरन्यूमरेरी)।<br>उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स अनुसार आईएटी 2026 में आवेदन करें-<br>स्टेप 1 &#8211; आईआईएसईआर एडमिशन 2026 के लिए वेबसाइट https://iiseradmission.in/ पर जाएँ।<br>स्टेप 2 &#8211; होमपेज पर ‘अप्लाई फॉर आईएटी-2026’ पर जाएँ<br>स्टेप 3 &#8211; अगले पेज पर रजिस्टर कर यूजर आईडी और पासवर्ड प्राप्त करें<br>स्टेप 4 &#8211; सफलतापूर्वक रजिस्ट्रेशन के बाद अनिवार्य डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें और उचित राशि भुगतान कर आवेदन पत्र पूरा भरें।<br>उम्मीदवार सभी विवरण सही से और ध्यानपूर्वक दें। आवेदन पत्र सबमिट करने के बाद विवरण नहीं बदल सकते हैं।<br>महत्वपूर्ण तिथियाँ<br>5 मार्च, 2026 &#8211; एप्लीकेशन पोर्टल खुलेगा<br>13 अप्रैल, 2026 &#8211; एप्लीकेशन पोर्टल बंद होगा<br>16-18 अप्रैल, 2026 &#8211; एप्लीकेशन फॉर्म में करेक्शन<br>24 मई, 2026 &#8211; एग्जाम हॉल टिकट जारी होगा<br>7 जून, 2026 &#8211; आईआईएसईआर एप्टीट्यूड टेस्ट (आईएटी) 2026 परीक्षा की तिथि (सुबह 9:00 बजे &#8211; दोपहर 12:00 बजे आईएसटी)<br>उम्मीदवारों को सलाह दी जाती है कि किसी अपडेट के लिए नियमित रूप से ऑफिशियल एडमिशन पोर्टल देखें- https://www.iiseradmission.in/#admission_important_dates<br>एनेक्सर<br>प्रो. अशोक कुमार गांगुली, निदेशक, आईआईएसईआर बरहामपुर, ओडिशा, ने कहा, “आईआईएसईआर बरहामपुर का शांत, सुकून भरा और स्वच्छ प्राकृतिक परिवेश उन्मुक्त सोच और सर्जना का संवर्धन करता है। “</p>



<p>प्रो. गोवर्धन दास, निदेशक, आईआईएसईआर भोपाल, ने कहा, “आईआईएसईआर एप्टीट्यूड टेस्ट एक प्रवेश परीक्षा से बढ़ कर आईआईएसईआर भोपाल के डायनामिक रिसर्च इकोसिस्टम का प्रवेश मार्ग है। हमारा कैंपस विद्यार्थियों को नई जानकारियाँ हासिल करने, परीक्षण और सर्जन करने की प्रेरणा देता है। आईआईएसईआर भोपाल कई खूबियों की वजह से खास है, जैसे यहाँ साइंस, इंजीनियरिंग, इकोनॉमिक्स और ह्यूमैनिटीज़ का अनोखा तालमेल है।”</p>



<p>प्रो. सुनील कुमार खरे, निदेशक, आईआईएसईआर कोलकाता, ने कहा, “आईआईएसईआर कोलकाता में हम आगामी पीढ़ी के लीडर्स को प्रशिक्षण देने के लिए कृतसंकल्प हैं, ताकि वे देश को साइंस, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और मैथेमेटिक्स के शिखर पर ले जाएँ। ”</p>



<p>प्रो. अनिल कुमार त्रिपाठी, निदेशक, आईआईएसईआर मोहाली, ने कहा, “आईआईएसईआर मोहाली हिमालय की तराई में बसी नॉलेज सिटी मोहाली में है, जहाँ नागरिकों के लिए बेहतरीन परिवेश है। यहाँ विद्यार्थियों की जिज्ञासा को एक उद्देश्य मिलता है, आश्चर्य भाव से ज्ञान सृजन होता है, विज्ञान का जुनून समझदारी और इनोवेशन का रूप लेता है और ज्ञान मनुष्य की प्रगति का संबल बनता है।”</p>



<p>प्रो. सुनील एस. भागवत, निदेशक, आईआईएसईआर पुणे, ने कहा, “आईआईएसईआर पुणे में दुनिया की कुछ सबसे अच्छी यूनिवर्सिटीज़ की तरह इंफ्रास्ट्रक्चर और सुविधाएँ हैं। अत्याधुनिक शोधों में संलग्न फैकल्टी हैं। ”</p>



<p>प्रो. जारुगु नरसिम्हा मूर्ति, निदेशक, आईआईएसईआर तिरुवनंतपुरम, ने कहा, “आईआईएसईआर तिरुवनंतपुरम में हम विद्यार्थियों को ऐसा परिवेश देने के लिए कृतसंकल्प हैं, जिसमें उत्सकुता से प्रेरित जिज्ञाशा वैज्ञानिक प्रशिक्षण को संपूर्णता प्रदान करती करती है। केरल के वेस्टर्न घाट की शांत पृष्ठभूमि में हमारा कैंपस एक प्रेरक परिवेश देता है, ताकि विभिन्न विषयों में जिज्ञाशा, सर्जना और सार्थक सहयोग का संवर्धन हो। ”</p>



<p>प्रो. शांतनु भट्टाचार्य, निदेशक, आईआईएसईआर तिरुपति, ने कहा, “आईआईएसईआर तिरुपति एक अग्रगण्य शोध-उन्मुख संस्थान है (यह वर्ष 2015 में स्थापित और आईआईएसईआर सीरीज़ का 6ठा संस्थान है)। आईआईएसईआर तिरुपति का 5-साल का इंटरडिसिप्लिनरी बीएस-एमएस प्रोग्राम मौलिक विज्ञान का शोध-उन्मुख शिक्षा से बेजोड़ तालमेल करता है। ”</p>



<p>इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) का संक्षिप्त परिचय<br>इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस एजुकेशन एंड रिसर्च (आईआईएसईआर) विज्ञान की शिक्षा और शोध दोनों क्षेत्रों में बेहतरीन काम करने के अपने मजबूत इरादों के लिए मशहूर हैं। ये संस्थान बरहमपुर, भोपाल, कोलकाता, मोहाली, पुणे, तिरुवनंतपुरम और तिरुपति में हैं। इस तरह आईआईएसईआर अपने विद्यार्थियों को नई खोज, इनोवेशन और शैक्षिक उपलब्धियों के लिए प्रोत्साहित करते हैं।</p>



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			</item>
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		<title>हेमकुंड साहिब की खोज : यह गुरुद्वारा समुद्र तल से करीब 15 हजार फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/discovery-of-hemkund-sahib-this-gurudwara-is-situated-at-an-altitude-of-about-15-thousand-feet-above-sea-level/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Sat, 28 Feb 2026 10:20:48 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
		<category><![CDATA[अध्यात्म]]></category>
		<category><![CDATA[उत्तराखंड]]></category>
		<category><![CDATA[जीवनशैली]]></category>
		<category><![CDATA[देश]]></category>
		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा : हेमकुंड साहिब की तीर्थ यात्रा सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक है। क्योंकि यह गुरुद्वारा समुद्र तल से करीब 15 हजार फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सिर्फ पैदल यात्रा करके ही पहुंचा जा सकता है। इस कठिन यात्रा के बाद भक्त पूरी श्रद्धाभाव के साथ &#8230;</p>
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										<content:encoded><![CDATA[
<figure class="wp-block-image size-full"><img decoding="async" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/02/image-57.jpg" alt="" class="wp-image-307388" /></figure>



<p><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा :</strong> हेमकुंड साहिब की तीर्थ यात्रा सबसे कठिन तीर्थ यात्राओं में से एक है। क्योंकि यह गुरुद्वारा समुद्र तल से करीब 15 हजार फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां सिर्फ पैदल यात्रा करके ही पहुंचा जा सकता है। इस कठिन यात्रा के बाद भक्त पूरी श्रद्धाभाव के साथ इस यात्रा को पार करते हुए हेमकुंड साहिक के दर्शन के लिए जाते हैं। वहीं इस जगह का संबंध लक्ष्मण जी के साथ भी माना जाता है। हम आपको हेमकुंड के रहस्यमयी इतिहास के बारे में बताने जा रहे हैं।</p>



<p>दसम ग्रंथ में वर्णन मिलता है कि इस स्थान पर सिखों के 10वें और अंतिम गुरु यानी श्री गुरु गोबिंद सिंह ने अपने पिछले जन्म में कठिन तपस्या की थी। यही वजह है कि सिख धर्म में हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा का ज्यादा महत्व है। हिंदू धर्म में यह स्थान उतना ही महत्व रखता है। मान्यता है कि रामायण काल में इस स्थान पर लक्ष्मण जी ने ध्यान किया था। यहां पर लक्ष्मण जी द्वारा स्थापित एक मंदिर भी है।</p>



<p>हेमकुंड की खोज के पीछे भी एक रोचक कथा है। दो से अधिक सदियों तक श्री हेमकुंड साहिब गुमनामी में रहा। श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने अपनी आत्मकथा विचित्र नाटक में इस जगह का जिक्र किया था। जिसके बाद यह स्थान अस्तित्व में आया था। वहीं पंडित तारा सिंह नरोत्तम हेमकुंड की भौगोलिक स्थिति का पता लगाने वाले सिख माने जाते हैं। श्री गुड़ तीरथ संग्रह में उन्होंने हेमकुंड साहिब का को 508 सिख धार्मिक स्थलों में से एक बताया।</p>



<p>हेमकुंड एक संस्कृत नाम शब्द है। इसका अर्थ हेम यानी बर्फ और कुंड यानी कि कटोरा। बर्फ से घिरे कटोरे जैसी झील की वजह से इस स्थान का नाम हेमकुंड पड़ा। पहाड़ों से घिरी इस जगह पर एक बड़ा तालाब है। जिसको लोकपाल कहते हैं।</p>
<p>The post <a href="https://suryodaybharat.com/discovery-of-hemkund-sahib-this-gurudwara-is-situated-at-an-altitude-of-about-15-thousand-feet-above-sea-level/">हेमकुंड साहिब की खोज : यह गुरुद्वारा समुद्र तल से करीब 15 हजार फुट से ऊपर की ऊंचाई पर स्थित है</a> appeared first on <a href="https://suryodaybharat.com">Suryoday Bharat</a>.</p>
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		<title>पंजाब में रेलवे विकास परियोजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं : रवनीत सिंह बिट्टू, केंद्रीय राज्य मंत्री</title>
		<link>https://suryodaybharat.com/there-is-no-shortage-of-funds-for-railway-development-projects-in-punjab-ravneet-singh-bittu-union-minister-of-state/</link>
		
		<dc:creator><![CDATA[Suryoday Bharat]]></dc:creator>
		<pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:54:15 +0000</pubDate>
				<category><![CDATA[Uncategorized]]></category>
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		<category><![CDATA[पंजाब]]></category>
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					<description><![CDATA[<p>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, गुरदासपुर / पठानकोट : केंद्रीय राज्य मंत्री (रेलवे एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) Ravneet Singh Bittu ने आज घोषणा की कि पंजाब में रेलवे विकास परियोजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि पंजाब के लिए वार्षिक रेलवे बजट आवंटन अब 2009–2014 की अवधि की तुलना में लगभग &#8230;</p>
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<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-27-at-17.07.36-1024x768.jpeg" alt="" class="wp-image-307226" /></figure>



<p><strong>सूर्योदय भारत समाचार सेवा, गुरदासपुर / पठानकोट : </strong>केंद्रीय राज्य मंत्री (रेलवे एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग) Ravneet Singh Bittu ने आज घोषणा की कि पंजाब में रेलवे विकास परियोजनाओं के लिए धन की कोई कमी नहीं है। उन्होंने बताया कि पंजाब के लिए वार्षिक रेलवे बजट आवंटन अब 2009–2014 की अवधि की तुलना में लगभग 25 गुना बढ़कर ₹5,673 करोड़ हो गया है। वर्तमान में राज्य भर में ₹ 26,382 करोड़ की अवसंरचना परियोजनाएं प्रगति पर हैं, जिनमें नई रेल लाइन बिछाना, स्टेशन पुनर्विकास, सुरक्षा उन्नयन उपाय और क्षमता वृद्धि से संबंधित अन्य कार्य शामिल हैं।</p>



<p>उन्होंने बताया कि राज्य के 30 रेलवे स्टेशनों का व्यापक पुनर्विकास Amrit Bharat Station Scheme के अंतर्गत ₹1,311 करोड़ की लागत से किया जा रहा है, ताकि यात्रियों को आधुनिक सुविधाएं और बेहतर सेवाएं प्रदान की जा सकें।<br>माननीय प्रधानमंत्री और रेल मंत्री का आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने दिल्ली से अंबाला के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण को मंजूरी देने की सराहना की। यह महत्वपूर्ण परियोजना दिल्ली–जम्मू कॉरिडोर के चौड़ीकरण (क्वाड्रुपलिंग) की व्यापक योजना का हिस्सा है, जो राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र को उत्तरी राज्यों से जोड़ने वाला एक प्रमुख मार्ग है। 194 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत ₹5,983 करोड़ है और इसे चार वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य है। उन्नत कॉरिडोर से श्री माता वैष्णो देवी कटरा, श्रीनगर, जम्मू और शिमला जैसे प्रमुख तीर्थ और पर्यटन स्थलों तक कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे पर्यटन और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा मिलेगा।</p>



<figure class="wp-block-image size-large"><img loading="lazy" decoding="async" width="1024" height="768" src="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-27-at-19.49.36-1024x768.jpeg" alt="" class="wp-image-307321" srcset="https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-27-at-19.49.36-1024x768.jpeg 1024w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-27-at-19.49.36-300x225.jpeg 300w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-27-at-19.49.36-768x576.jpeg 768w, https://suryodaybharat.com/wp-content/uploads/2026/02/WhatsApp-Image-2026-02-27-at-19.49.36.jpeg 1280w" sizes="auto, (max-width: 1024px) 100vw, 1024px" /></figure>



<p>Ravneet Singh Bittu ने जालंधर कैंट–पठानकोट (JRC–PTKC) सेक्शन पर मिर्थल रेलवे स्टेशन के निकट नालुंगा (किमी 94.030) पर रोड अंडर ब्रिज (RUB) के निर्माण कार्य की शुरुआत की भी घोषणा की। यह आरयूबी 7.5 मीटर स्पैन, 5.5 मीटर क्लियर हाइट और 32 डिग्री स्क्यू के साथ दो रेलवे लाइनों को कवर करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। जम्मू डिवीजन द्वारा इस कार्य को संशोधित लागत ₹ 18.28 करोड़ पर प्रस्तावित किया गया है।</p>



<p>नैरो गेज लाइन पर यातायात समस्या के संबंध में उन्होंने बताया कि इस खंड में 12 लेवल क्रॉसिंग गेट हैं, जहां उच्च ट्रैफिक वाहन इकाइयां (TVU) बहुत कम दूरी (100–200 मीटर) पर स्थित हैं और यह क्षेत्र घनी आबादी वाले नगर क्षेत्र में आता है। यह खंड एक प्रमुख परिचालन बाधा बना हुआ है, जिसका कोई अल्पकालिक इंजीनियरिंग समाधान उपलब्ध नहीं है।</p>



<p>दीर्घकालिक समाधान के रूप में, पठानकोट जंक्शन से लगभग 10 किलोमीटर दूर स्थित DLSR के विकास का प्रस्ताव है, जहां पर्याप्त भूमि उपलब्ध है और लेवल क्रॉसिंग भी कम हैं, जिससे शहरी हस्तक्षेप न्यूनतम रहेगा। DLSR में क्षमता वृद्धि कार्य की अनुमानित लागत ₹21.42 करोड़ है, जिसमें दो स्टेबलिंग लाइन, एक पिट लाइन, एक सिक लाइन, एक डीजल लोको पिट लाइन और एक शंटिंग नेक का प्रावधान शामिल है।</p>



<p>पठानकोट कैंट रेलवे स्टेशन के पुनर्विकास पर बोलते हुए Ravneet Singh Bittu ने कहा कि एकीकृत पुनर्विकास के लिए व्यवहार्यता अध्ययन, मास्टर प्लानिंग, शहरी डिजाइनिंग, इंजीनियरिंग तथा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने हेतु तकनीकी परामर्श का प्रस्ताव किया गया है।</p>
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