
सूर्योदय भारत समाचार सेवा, लखनऊ : प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास कैबिनेट मंत्री धर्मपाल सिंह की अध्यक्षता में निराश्रित गोवंश के बेहतर भरण पोषण के लिए भूसा बैंक की स्थापना और गोचर भूमि के विस्तार कार्य को तीव्र गति देने के लिए प्रदेश के 18 मंडलों हेतु नोडल अधिकारी नामित कर दिए गए हैं। नोडल अधिकारियों द्वारा गौशालाओं का भ्रमण कर उसकी रिपोर्ट 30 मार्च तक उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों द्वारा प्रत्येक गौशाला के लिए व्यवस्थित प्रबन्धन,अपना “भूसा बैंक” गो आश्रय स्थलों के संचालन में पारदर्शिता, तकनीक और जन सहभागिता के लक्ष्य की पूर्ति सुनिश्चित की जाएगी।
धर्मपाल सिंह ने रविवार को गौतमपल्ली स्थित अपने मंत्री आवास पर उच्च स्तरीय बैठक की। उन्होंने मुख्यमंत्री द्वारा भूसा बैंक एवं निराश्रित गोवंश के संरक्षण एवं संवर्धन के संबंध में दिए गए मार्गदर्शन एवं सुझावों के क्रियान्वयन के संबंध में अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि 30 मार्च तक प्रत्येक जनपद द्वारा भूसा एवं साइलेज का टेंडर पूरा कर लिया जाए। टेंडर में दर और पारदर्शिता का पूरा ध्यान रखा जाए।
मंत्री सिंह ने निर्देश दिए कि आगामी 15 अप्रैल से अभियान चलाकर भूसा संग्रहण,भूसा बैंक तथा भूसा प्रबंधन का कार्य पूरा किया जाए। सभी गो आश्रय स्थलों पर भूसा बैंक (अस्थाई/स्थाई) बनाया जाए तथा दो माह का भूसा आरक्षित भंडारण के रूप में रखा जाए। गो आश्रय स्थलों में निश्चित रूप पर रजिस्टर भी पूर्ण कराया जाए। हरे चारे की आपूर्ति हेतु स्थानीय किसानों से अनुबंध किया जाए तथा ऐसे कृषकों और चारा उत्पादकों की सूची मोबाइल नंबर सहित तैयार कर ली जाए। गोवंश हेतु हरे चारे भूसे की कोई कमी न हो। सभी मुख्य पशु चिकित्साधिकारी भूसा संग्रहण हेतु जन प्रतिनिधियों, दान दाताओं एवं समाज सेवियों का भी सहयोग जरूर लें।
सिंह ने कहा कि गर्मी के दृष्टिगत गोआश्रय स्थलों में गोवंश को धूप , लू से सुरक्षित रखा जाए। भूसा, हरा चारा, चोकर, पानी, विद्युत एवं औषधियों आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाए। कोई भी गोवंश भूखा प्यास न पाया जाए। पशुओं हेतु उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं और वैक्सीन की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता ना किया जाए। पशुओं के उत्तम स्वास्थ्य और पौष्टिक चारे के आधार पर ही दुग्ध विकास कार्यक्रमों और नस्ल सुधार व कृत्रिम गर्भाधान के लक्ष्यों को पूर्ण व सफल बनाया जा सकता है। गोवंश के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाए। केयर टेकर रात्रि में गोआश्रय स्थल पर ही रूके और आवश्यक कार्य सुचारू रूप से पूरा करे। मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गरीब परिवारों को गाय उपलब्ध कराई जाए और अन्य लघु पशु योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाए। सिंह ने कहा कि गोचर भूमियों को कब्जामुक्त पर हरा चारा भी उगाया जाय।
बैठक में निर्णय लिया गया कि पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह द्वारा गोरखपुर और वाराणसी मंडल का स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा। अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम को कानपुर एवं लखनऊ मंडल, सीईओ पशुधन विकास परिषद डॉ प्रमोद कुमार सिंह को प्रयागराज मंडल, श्रीमती के0 धनलक्ष्मी दुग्ध आयुक्त को झांसी और चित्रकूट मंडल, विशेष सचिव दुग्ध विकास राम सहाय यादव को आजमगढ़ और अयोध्या मंडल, निदेशक पशुपालन प्रशासन एवं विकास डॉ. मेंम पाल सिंह को देवीपाटन एवं बस्ती मंडल, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डॉ. राजेंद्र प्रसाद को आगरा एवं अलीगढ़ मंडल, अपर निदेशक गोधन डॉ. प्रमोद कुमार को मेरठ एवं सहारनपुर मंडल, अपर निदेशक डॉ. संगीता तिवारी को बरेली मंडल, अपर निदेशक डॉ. राजीव वशिष्ठ को मुरादाबाद मंडल तथा डॉ. संजय श्रीवास्तव को मिर्जापुर और विंध्याचल मंडल हेतु नोडल अधिकारी नामित किया गया है।
बैठक में अपर मुख्य सचिव, पशुधन एवं दुग्ध विकास मुकेश मेश्राम ने मंत्री को भूसा संग्रहण एवं गोशालाओं में आवश्यक व्यवस्थाओं के संबंध में अवगत कराया और आश्वस्त किया कि उनसे प्राप्त निर्देशों का पूर्णतः अनुपालन सुनिश्चित किया जायेगा। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिये कि भूसा संग्रहण हेतु प्राथमिकता के आधार पर कार्य किया जाए ताकि गोशालाओं में वर्ष पर्यन्त चारे-भूसे की कमी न होने पाये और गोवंश की सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम सुनिश्चित किया जाए।
बैठक में डॉ. मेमपाल सिंह, निदेशक, प्रशासन एवं विकास, पशुपालन, डॉ. राजेन्द्र प्रसाद, निदेशक, रोग नियन्त्रण एवं प्रक्षेत्र तथा डॉ. पी०के० सिंह, सहित अन्य योजनाधिकारी उपस्थित रहे।