
नई दिल्ली। लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सदस्यों ने कुछ विषयों पर आसन के समीप आकर नारेबाजी की और सदन की बैठक शुरू होने के पांच मिनट बाद ही दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। बैठक शुरू होने पर विपक्ष के कुछ सदस्य अपनी बात कहना चाह रहे थे जिस पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने उनसे कहा कि यदि वे कुछ कहना चाहते हैं तो पहले नोटिस दें।
विपक्ष संसद के मानसून सत्र में सरकार को तीन केंद्रीय कृषि कानूनों, पेगासस जासूसी मामला, महंगाई समेत विभिन्न विषयों पर घेरने का प्रयास कर रहा है । इस बीच अध्यक्ष ने प्रश्नकाल शुरू कराया और कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने भाजपा सदस्य जसकौर मीणा के पूरक प्रश्न का उत्तर दिया। विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और वे प्लेकार्ड लेकर आसन के समीप पहुंच गये।
अध्यक्ष ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि सदन में तख्तियां लाना नियम प्रक्रिया के तहत उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कल कहा था कि वह हर विषय पर जवाब देने को तैयार है। उन्होंने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से कहा कि वे अपने स्थान पर जाकर बैठें और जिन मुद्दों पर भी चर्चा करना चाहते हैं, सरकार उसके लिए तैयार है।
बिरला ने कहा, ” सरकार हर विषय पर चर्चा की प्रतिबद्धता व्यक्त कर चुकी है। तो फिर विपक्ष नारेबाजी क्यों कर रहा है। यह उचित नहीं है । जिस विषय पर चर्चा चाहते हैं, उसके लिये नोटिस दें । ”
हालांकि विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और अध्यक्ष ने 11:05 बजे बैठक को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया। कांग्रेस समेत विपक्षी सदस्यों ने तीन नये केंद्रीय कृषि कानूनों समेत कुछ विषयों पर सोमवार को भी लोकसभा में नारेबाजी की थी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मंत्रिपरिषद के नये सदस्यों का परिचय नहीं कराने दिया। मानसून सत्र के पहले दिन सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी थी।
पेगासस सहित विभिन्न मुद्दे पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के हंगामे के कारण मंगलवार को राज्यसभा की बैठक पहली बार के स्थगन के बाद एक बजे तक स्थगित कर दी गई। इससे पहले, सदन की कार्यवाही आरंभ होने के कुछ ही देर बाद दोपहर बारह बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई थी।
जैसे ही सदन की कार्यवाही 12 बजे आरंभ हुई कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित अन्य विपक्षी दलों ने हंगामा प्रारंभ कर दिया। हंगामा कर रहे सदस्यों ने जब नारेबाजी आरंभ की तो उपसभापति हरिवंश ने उन्हें वापस लौटने का आग्रह किया लेकिन उनकी एक ना सुनी गई। हरिवंश ने कहा, ”आप सदन नहीं चलाना चाहते हैं…आसन के समीप आ गए हैं आप लोग…आप नहीं चाहते कि प्रश्नकाल हो…कृपया अपन-अपनी सीट पर लौट जाएं।