
अशाेेेक यादव, लखनऊ। देश में भले ही कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या एक लाख से अधिक हो गई है लेकिन ठीक होने वालों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है और अब कोरोना के ठीक होने की दर बढ़कर 38 प्रतिशत से अधिक हो गई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार देश में इस समय कोरोना के 58802 सक्रिय मामले हैं और पिछले 24 घंटों में 2350 लोगों के ठीक हो जाने के बाद स्वस्थ हुए लोगों की कुल संख्या 39173 हो गयी है।
कोरोना से अब तक देश में 3163 लोगों की मौत हो गई है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मुताबिक देश में अभी तक 24,04267 कोरोना परीक्षण हो चुके हैं और पिछले 24 घंटों में 101475 नमूनों की जांच की गई थी और संक्रमितों का कुल आंकडा 4.2 प्रतिशत है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थिति रिपोर्ट 118 में बताया गया है कि विश्व के विभिन्न देशों में कोरोना के पुष्ट मामलों यानि प्रति एक लाख आबादी की बात की जाए तो यह भारत में यह बहुत ही बेहतर है।
देश में यह संख्या 7.1 प्रति लाख हैं जबकि विश्व की आबादी के अनुसार यह 60 मामले प्रति एक लाख है। तथा विश्व स्तर पर मृत्यु दर 6.92 प्रतिशत है और हमारे देश में मृत्यु दर 3़1 प्रतिशत के आसपास है।
अगर देश में लॉकडाउन लागू करने का फैसला समय पर नहीं किया होता तो भारत में कोरोना संक्रमितों की संख्या 24 अप्रैल को ही एक लाख से अधिक हो गई होती लेकिन केन्द्र सरकार ने समय रहते जो कदम उठाए उनसें कोरोना मामलों की रफ्तार धीमी पड़ गई।
देश में 21 मार्च को कोरोना मामलों के दोगुना होने की दर 3़ 2 दिन थी और उस दिन 300 केस सामने आए थे इस समय देश में कोरेाना मामलों के दुगना होने की दर 13 दिन औसतन है।
कोरोना के मामलों में 23 मार्च को एक मोड़ आया था और उस समय डबलिंग रेट का ग्राफ पांच दिन हो गया था और तब लाकडाउन शुरू नहीं हुआ था लेकिन जनता कर्फ्यू हो चुका था।
यह सब यात्रा संबंधी प्रतिबंधों और सामाजिक दूरी के मानकों को अपनाने की वजह से हुआ था। इसके बाद लाक डाउन की घोषणा कर दी गई थी और छह अप्रैल को देश पांच दिनों के डबलिंग रेट को पार गया था।
अगर केन्द्र सरकार इन नियमों को लागू नहीं करती तो हम तीन दिन के डबलिंग रेट की रफ्तार से आज कहां होते , कोई भी इसका अनुमान लगा सकता है इसमें सर्विलांस की भी अहम भूमिका रही है और जो लोग कोरोना पीड़ित थे उनके कांटेक्ट ट्रेस किए गए थे।
लॉक डाउन की इस अवधि मेेें देश ने अपनी आदतों में बदलाव किया है और यह जन आंदोलन का रूप ले चुका है जिसमें सामुदायिक भागीदारी अहम है।
आगे भी रणनीति बनाई जा रही है और आज कहा जा सकता है कि समय पर उठाए गए कदमोंं से यह काफी हद तक नियंत्रित किया जा चुका है। अभी लॉक डाउन का चौथा दौर चल रहा है और इसके नतीजे भी अगले कुछ दिनों में बेहतर दिखेंगें।