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5 माह प्रदर्शनों के बाद हांगकांग ने वापस लिया विवादित प्रत्यर्पण विधेयक

बीजिंग : 5 महाने के हिंसक प्रदर्शनों के बाद आखिर हांगकांग की प्रमुख कार्यकारी अधिकारी कैरी लैम ने आधिकारिक तौर पर चीन का विवादित प्रत्यर्पण विधेयक वापस ले लिया है। इस विधेयक के विरोध में हांगकांग में लाखों लोग सड़क पर उतर आए थे। चीन के स्वायत्त प्रांत हांगकांग में लगातार चल रहे ऐतिहासिक प्रदर्शन में प्रदर्शनकारियों की ये बड़ी जीत मानी जा रही है। इससे पहले खबर थी कि हांगकांग में प्रद्रशनों को लेकर चीन कैरी लैम पर गाज गिराने की तैयारी कर रहा है। ऐसे में चीन इसके राजनीतिक समाधान का रास्ता खोज रहा था। हांगकांग में लोकतंत्र समर्थक अशांति के लगभग पांच महीने बाद बीजिंग हांगकांग के प्रमुख कार्यकारी अधिकारी कैरी लैम को हटाने की योजना तैयार कर रहा है।

बुधवार को एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा ने हांगकांग में लोकतंत्र के समर्थन में हो रहे विरोध प्रदर्शन को लेकर चीन के खिलाफ एक प्रस्ताव पास किया था। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने लैम को हटाने की योजना के साथ आगे बढ़ने का फैसला लिया है। रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि मार्च तक उनका प्रतिस्थापन किया जाएगा। इतना ही नहीं लैम की जगह कौन चीफ होगा इस रिपोर्ट में इसका भी जिक्र किया गया है। चीफ की रेश में प्रमुख उम्मीदवार हांगकांग के मौद्रिक प्राधिकरण के पूर्व प्रमुख नॉर्मन चैन और हेनरी टैंग शामिल हैं। वह हांगकांग प्रशासन में वित्त सचिव और मुख्य सचिव के रूप में भी काम किया है। इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है को उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेजा जा सकता।  हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन के लिए फरवीर में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी और हांगकांग वापस आ गया था। हांगकांग की अगर बात की जाए तो यह चीन का एक स्वायत्त द्वीप है। चीन इसे अपने संप्रभु राज्य का हिस्सा मानता है। वहीं हांगकांग की ताइवान के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जिसके कारण हत्या के मुकदमे के लिए उस व्यक्ति को ताइवान भेजना मुश्किल है। अगर ये कानून पास हो जाता तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाती, जिनके साथ हांगकांग के समझौते नहीं हैं। जैसे संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकता। हांगकांग के लोग इस कानून का जमकर विरोध कर रहे थे।

वो सरकार द्वारा कानून को निलंबित किए जाने के बाद भी नहीं थमे, उनका कहना था कि इसे पूरा तरह से खत्म कर दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों का मानना है कि अगर ये कानून कभी भी पास होता है तो हांगकांग के लोगों पर चीन का कानून लागू हो जाएगा। बीते कुछ सालों से सरकार के लिए लोगों में अविश्वास काफी बढ़ गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो बीजिंग के प्रभाव में आकर फैसले ले रही है। जिसके चलते लोग डरे हुए हैं कि बीजिंग गलत तरीके से इस कानून का लोगों के खिलाफ इस्तेमाल करेगा। हांगकांग की कुल आबादी 74 लाख से कुछ अधिक है। ब्रिटेन के उपनिवेश रहे हांगकांग को साल 1997 में चीन के सुपुर्द कर दिया गया था। तब यहां अभूतपूर्व प्रदर्शन हुए थे। जिसके बाद हाल में जारी प्रदर्शन ऐतिहासिक हैं। माना जा रहा है कि भविष्य में हांगकांग में लोकतंत्र की मांग कर सकती हैं।

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