लखनऊ। रविवार को संविधान निर्माता भारतरत्न बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर को उनकी 128वीं जयन्ती के शुभ अवसर पर अपने व पार्टी की ओर से श्रद्धा-सुमन अर्पित करते हुये बी.एस.पी. की राष्ट्रीय अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री व पूर्व सांसद मायावती ने आज कहा कि आज पूरे देश में बहुजन समाज पार्टी द्वारा भारतीय संविधान के निर्माता व दलितों, पिछड़ों एवं अन्य उपेक्षित वर्गों के मसीहा परम पूज्य बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की जयन्ती विभिन्न रूपों में मनाई जा रही है और इस शुभ-अवसर पर उन्होंने बाबा साहेब डा. अम्बेडकर को अपनी व अपनी पार्टी की ओर से भी पूरे तहे दिल से श्रद्धा-सुमन अर्पित किये।
परम पूज्य बाबा साहेब डॉ. अम्बेडकर की जयंती पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के साथ-साथ देशवासियों व देश-दुनिया में फैले उनके करोड़ों अनुयाइयों को हार्दिक बधाई व शुभकामनायें देते हुये उनके आत्म-सम्मान व स्वाभिमान के मानवतावादी मूवमेन्ट के अधूरे कारवाँ को वोटों की शक्ति से मंजिल तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया। कहा कि एक व्यक्ति-एक वोट और हर वोट का एक समान मूल्य का अमूल्य संवैधानिक अधिकार देकर बाबा साहेब डा. अम्बेडकर ने सदियों से शोषित-पीड़ित दलितों, पिछड़ों व धार्मिक अल्पसंख्यकों आदि को अपना उद्धार,उत्थान,कल्याण स्वयं करने के लिए सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करने का आह्वान किया था,
जिसे हमें पूरा करना है। आज छत्तीसगढ़ राज्य में चुनावी रैली को सम्बोधित करने के लिए लखनऊ से रवाना होने से पहले उन्होंने आदर्श चुनाव आचार संहित का पूरा ध्यान व सम्मान करते हुये ऐतिहासिक डा. अम्बेडकर स्थल जाने के बजाय अपने निवास पर ही बाबा साहेब के चित्र पर वरिष्ठ सहयोगियों के साथ पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें श्रद्धा-सुमन अर्पित किया।बीजेपी प्रमुख अमित शाह की आज इस बयानबाजी पर कि बीएसपी चुनाव के समय में ही डा. अम्बेडकर को याद करती है, को उन्होंने मिथ्या व शरारतपूर्ण बयान बताया ओर कहा कि बीएसपी ही एकमात्र ऐसी पार्टी है ।
जो बाबा साहेब से दिन-रात साल में 365 दिन प्रेरणा लेकर सर्वसमाज के हित में काम करती है और इसी आधार पर एक मूवमेन्ट भी है व सरकार में रहकर तो उनके आदर-सम्मान में एक नहीं बल्कि अनेकों ऐतिहासिक काम भी करती है।और यदि बीजेपी बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के भक्त होती तो फिर वे उनके अनुयाइयों पर आयेदिन हो रही जुल्म-ज्यादती को किसी भी कीमत पर होने नहीं देती। इतना ही नहीं बल्कि बाबा साहेब की जगह-जगह मूर्ति तोडे़ जाने के साथ-साथ उनके करोड़ों अनुयाइयों का संवैधानिक हक छीनने तथा उन पर भारी जुल्म-ज्यादती व पुलिस अत्याचार आदि करने वाली बीजेपी एवं इनकी केन्द्र व राज्य सरकारों को क्या कोई हक बनता है कि वे बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की जयन्ती मनायें?
बीजेपी पहले अपने गिरेबान में झांक कर देखे। बाबा साहेब को श्रद्धा-सुमन अर्पित करने के बाद मायावती ने देशभर में बी.एस.पी. के समस्त छोटे-बड़े कार्यकर्ताओं व बाबा साहेब के करोडों अनुयाइयों का तहेदिल से शुक्रिया अदा करते हुये उन्हें शुभकामनायें दीं जिन्होंने आज डा. अम्बेडकर को बिना किसी निजी स्वार्थ के दिल से स्मरण किया और उनके सपनों का समतामूलक भारत बनाने के लिये अपनी पार्टी की सरकार बनाने का संकल्प लिया। मायावती ने कहा कि बाबा साहेब की सोच सर्वसमाज के हित व कल्याण से ओत-प्रोत थी और यही कारण है कि उन्होंने इस देश को अनुपम मानवतावादी संविधान दिया जो देश की सबसे बड़ी शान व ताक़त है। उल्लेखनीय है ।
मायावती के नेतृत्व में अब तक उत्तर प्रदेश में चार बार बनी उनकी सरकार में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए तथा उनके आदर-सम्मान में जनहित की अनेकों महत्वपूर्ण योजनायें और कार्यक्रम भी संचालित किये गये। साथ ही, बाबा साहेब के सम्मान में आगरा विश्वविद्यालय का नामकरण बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर किया गया। इसी विश्वविद्यालय में बाबा साहेब डा. अम्बेडकर के नाम पर अम्बेडकर पीठ की भी स्थापना की गयी। डा. अम्बेडकर के नाम पर अनुसूचित जाति,जनजाति कोचिंग सेन्टर की स्थापना जनपद अलीगढ़ और आगरा में की गयी। फै़ज़ाबाद मण्डल के अन्तर्गत अम्बेडकरनगर के नाम से नये ज़िले का गठन किया गया।
वाराणसी में बाबा साहेब के नाम पर स्टेडियम का नामकरण तथा रामपुर में संग्रहालय व पुस्तकालय की स्थापना की गयी। इसके अलावा, जनपद बांदा में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर मेडिकल कालेज, नोएडा तथा गे्रटर नोएडा में डा. भीमराव अम्बेडकर मल्टी सुपर स्पेशियल्टी अस्पताल स्थापित कराये गये। इसके अलावा कानपुर में डाॅ. अम्बेडकर इंस्टीट्यूट आॅफ टेक्नाॅलाॅजी फॉर हैंडीकैप्ड तथा जनपद आज़मगढ़ में डा. अम्बेडकर भवन का निर्माण कराया गया। मैनपुरी तथा क़न्नौज में डा. भीमराव अम्बेडकर राजकीय महाविद्यालय की स्थापना की गयी। इसी प्रकार, लखनऊ में डा. भीमराव अम्बेडकर अन्तर्राष्ट्रीय खेल स्टेडियम तथा गे्रटर नोएडा में 500 सीटों वाले डा. अम्बेडकर अनुसूचित जाति,जनजाति छात्रावास का निर्माण कराया गया। आगरा एवं गौतम बुद्ध नगर में डा. अम्बेडकर पार्क स्थापित किया गया।
लखनऊ में डा. अम्बेडकर पर्यावरण म्यूज़ियम तथा डाॅ. अम्बेडकर पर्यावरण परिसर का निर्माण कराया गया। बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर विश्वविद्यालय, लखनऊ में अम्बेडकर पीठ की स्थापना तथा प्रशासनिक भवन संकुल का निर्माण कराया गया है। बाबा साहेब डा. अम्बेडकर की स्मृति में बी.एस.पी. सरकार द्वारा लखनऊ में गोमती नदी के तट पर विश्व-स्तरीय ‘‘डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल‘‘ स्थापित किया गया है, जिसके अन्र्तगत डा. भीमराव अम्बेडकर विहार, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन गैलरी, डा. भीमराव अम्बेडकर स्मारक दृश्य स्थल, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन प्रतिबिम्ब स्थल तथा सामाजिक परिवर्तन संग्रहालय स्थापित है।
इसके अलावा, डा. भीमराव अम्बेडकर गोमती पार्क का निर्माण और इस पार्क में डा. अम्बेडकर की प्रतिमा भी स्थापित की गयी। साथ ही, लखनऊ में डा. भीमराव अम्बेडकर गोमती विहार खण्ड-1, खण्ड-2, खण्ड-3 एवं डाॅ. भीमराव अम्बेडकर गोमती विहार खण्ड-4, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल हेतु नवीनीकृत गोमती ब्रिज, डा. भीमराव अम्बेडकर सामाजिक परिवर्तन स्थल हेतु ओवर ब्रिज का निर्माण भी कराया गया। डाॅ. भीमराव अम्बेडकर गोमती विहार खण्ड-1 में बाबा साहेब की चहुंमुखी प्रतिमा की स्थापना की गयी है। बी.एस.पी. सरकार द्वारा बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर लघु उद्यमी प्रादेशिक पुरस्कार योजना, डा. अम्बेडकर निःशुल्क बोरिंग योजना तथा डा. अम्बेडकर कृषि ऊर्जा सुधार योजना भी संचालित की गयी।
इसके अलावा, लखनऊ में देश के सबसे बड़े सभागारों में एक डा. भीमराव अम्बेडकर सभागार का निर्माण तथा सभागार परिसर में बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा स्थापित की गयी है। दिल्ली के नज़दीक नोएडा में भी भव्य ‘‘राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल‘‘ स्थापित करके इसमें बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर के साथ-साथ, देश में तिरस्कृत रखे गये दलित एवं अन्य पिछड़े वर्गों में जन्में अनेकों और महान सन्तों, गुरुओं व महापुरुषों को भी पूरा-पूरा आदर-सम्मान दिया गया, परन्तु बाबा साहेब डा. भीमराव अम्बेडकर जैसी महान विभूति द्वारा समाज व देश निर्माण के जर्बदस्त ऐतिहासिक कार्यों को देखते हुये ये सब कुछ कार्य मामूली भेंट ही मानी जायेगी जिसे भी विरोधी लोग आसानी से पचा नहीं पा रहे हैं।