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भारत में 7 साल की ऊंचाई पर चांदी, औद्योगिक मांग से बढ़ी चमक

कोरोना के गहराते प्रकोप के बीच औद्योगिक गतिविधियों के दोबारा पटरी पर लौटने से चांदी की चमक बढ़ गई है। घरेलू वायदा बाजार में चांदी का भाव गुरुवार को फिर सात साल की नई ऊंचाई को छुआ। औद्योगिक मांग बढ़ने की उम्मीदों से पीली धातु के मुकाबले चांदी कुछ ज्यादा चमकदार बन गई है। बुलियन बाजार विशेषज्ञ बताते हैं कि इस समय निवेशकों का रुझान सोने से कहीं ज्यादा चांदी की तरफ है।

भारत में चांदी का भाव 2013 के बाद 53,000 रुपये प्रति किलो के उपर चल रहा है जबकि सोने का भाव इस समय 49,000 रुपये प्रति 10 ग्राम के उपर चल रहा है। वहीं, अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चांदी 19 डॉलर प्रति औंस के ऊपर है जबकि सोना 1800 डॉलर प्रति औंस के ऊपर चल रहा है।

कमोडिटी बाजार के जानकार बताते हैं कि सोना और चांदी के भाव का अनुपात फिर घटता जा रहा है जो इस बात का संकेत है कि सोने के बजाय चांदी की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ा है।

कोरोना काल में महंगी धातुओं की निवेश मांग बढ़ने से घरेलू एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भी सोने और चांदी के दाम में जबरदस्त तेजी आई है और अब दुनियाभर में धीरे-धीरे लॉकडाउन खुलने से औद्योगिक गतिविधियों के दोबारा पटरी पर लौटने से चांदी की चमक सोने के मुकाबले ज्यादा बढ़ गई है।

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (एमसीएक्स) पर चांदी के सितंबर वायदा अनुबंध मंे गुरुवार को पिछले सत्र से 181 रुपये की नरमी के साथ 52877 रुपये प्रति किलो पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले भाव 53,199 रुपये प्रति किलो तक उछला, जोकि सितंबर 2013 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर। वहीं, सोने के अगस्त अनुबंध में पिछले सत्र से 69 रुपये की कमजोरी के साथ 49090 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार चल रहा था जबकि इससे पहले भाव 49245 रुपये तक उछला। एमसीएक्स पर सोने का भाव आठ जुलाई 2020 को 49348 रुपये प्रति 10 ग्राम तक उछला था जोकि रिकॉर्ड स्तर है।

हाजिर बाजार में एक दिन पहले 24 कैरट शुद्धता का सोना 49250 रुपये प्रति 10 ग्राम चल रहा था। वहीं, चांदी का भाव 52,195 रुपये प्रति किलो चल रहा था। हाजिर भाव में जीएसटी शामिल नहीं है।

इंडिया बुलियन एवं ज्वेलर्स एसोसिएशन (आईबीजेए) के नेशनल सेक्रेटरी सुरेंद्र मेहता ने कहा कि चांदी औद्योगिक धातु है और लॉकडाउन खुलने से उद्योग में इसकी मांग बढ़ने की उम्मीदों से कीमतों में तेजी दखी जा रही है। हालांकि उनका कहना है कि सोने का भाव ऊंचाई से थोड़ा टूटा है जो क्षणिक गिरावट है मगर आगे तेजी का रुख बना हुआ है।

केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि 2013 में जब चांदी का भाव 50,000 रुपये से ऊपर उछला था तब सोना और चांदी के भाव का अनुपात घटकर 31 आ गया था जबकि इस साल मार्च में यह अनुपात ऐतिहासिक उंचाई 127 चल चला गया, लेकिन फिर अनुपात घटकर 96 के करीब आ गया है जो इस बात का संकेत है कि सोने के बजाय चांदी में निवेशकों का रुझान बढ़ रहा है।

चांदी में आई जोरदार तेजी की मुख्य वजहों में कोरोना के प्रकोप के चलते कीमती धातुओं के प्रति निवेशकों का रुझान है। वहीं, चांदी की औद्योगिक मांग भी हमेशा बनी रहती है।

केडिया ने बताया कि सिल्वर इंस्टीट्यूट के अनुसार 2020 की पहली छमाही में चांदी की निवेश मांग में 10 फीसदी इजाफा हुआ है और शुरूआती कमजोरी के बाद मई से इसकी औद्योगिक मांग बढ़ गई है। उन्होंने कहा कि सिल्वर इंस्टीट्यूट का यह भी अनुमान है कि 2020 में चांदी की खदानों से आपूर्ति सात फीसदी कम होगी, खासतौर से तब जब औद्योगिक मांग सामान्य के आसपास रहेगी।

कमोडिटी विश्लेषक अनुज गुप्ता कहते हैं कि वैश्विक स्तर पर औद्योगिक मांग के साथ-साथ देश में आभूषण में भी चांदी की मांग इस बार तेज रह सकती है क्योंकि मानसून अच्छा है जिससे अच्छी पैदावार की उम्मीद की जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्र में आभूषणों की मांग को सपोर्ट मिलेगा। उन्होंने कहा कि जब कभी सोना महंगा होता है तो ग्रामीण इलाके में चांदी के आभूषणों की मांग बढ़ जाती है।

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