लखनऊ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज राज्यपालों से अनुरोध किया कि वे जीवन के विविध क्षेत्रों के अपने अनुभवों से लोगों को केंद्रीय योजनाओं का अधिकतम फायदा उठाने में मदद करें। उन्होंने इसके साथ ही संघीय ढांचे में उनकी निर्णायक भूमिका की भी याद दिलाई। राष्ट्रपति भवन में राज्यपालों के 49 वें सम्मेलन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि अच्छी खासी जनजातीय आबादी वाले प्रदेशों में वे यह सुनिश्चित करने में मदद कर सकते हैं कि ये समुदाय शिक्षा, खेल और वित्तीय समग्रता के क्षेत्र में सरकार की पहल का अधिकतम फायदा उठा पाएं।
उन्होंने इस संदर्भ में भी विस्तार से अपनी बात रखी कि राज्यपाल कैसे विभिन्न क्षेत्रों के अपने अनुभवों का इस्तेमाल इस तरह से कर सकते हैं कि आम लोगों को विभिन्न केंद्रीय योजनाओं और पहलों का अधिकतम लाभ मिल सके। एक आधिकारिक बयान में मोदी को उद्धृत करते हुए कहा गया, ‘‘देश के संघीय और संवैधानिक ढांचे में राज्यपालों को एक निर्णायक भूमिका निभानी है।’’ उन्होंने कहा कि जनजातीय समुदाय ने स्वतंत्रता संग्राम में अहम भूमिका निभाई है, इसको पहचान मिलनी चाहिये और इसे डिजिटल संग्रहालयों के जरिये भविष्य की पीढ़ियों के लिये दर्ज किया जाना चाहिये।
राज्यपालों के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति होने को भी रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर का इस्तेमाल युवाओं के बीच योग को लेकर ज्यादा जागरुक करने के लिये किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी की 150 वीं जयंती के आयोजन के लिये भी विश्वविद्यालय केंद्र बिंदु बन सकते हैं। प्रधानमंत्री ने विकास से संबंधित कुछ अहम विषयों की भी चर्चा की जैसे राष्ट्रीय पोषण अभियान , गांवों का विद्युतीकरण , और आकांक्षी जिलों में विकास से संबंधी मानक।
उन्होंने सुझाव दिया कि राज्यपाल उन गांवों का दौरा कर खुद विद्युतीकरण के लाभ जान सकते हैं जिनमें हाल ही में बिजली पहुंची है। उन्होंने कहा कि हाल ही में 14 अप्रैल से चालू किये गये ग्राम स्वराज अभियान के तहत 16,000 गांवों में सरकार की सात योजनाओं को पूरी तरह से लागू किया गया है। उन्होंने कहा कि जन भागीदारी के जरिये इन गावों को सात समस्याओं से पूरी तरह से मुक्त किया गया है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज अभियान को 15 अगस्त के लक्ष्य के साथ अब 65,000 नए गावों में लागू किया गया है। प्रधानमंत्री ने सुझाव दिया कि अगले वर्ष आयोजित होने वाले 50 वें राज्यपाल सम्मेलन के लिये तैयारी तुरंत आरंभ कर दी जानी चाहिये। इस प्रयास के जरिये इस वार्षिक आयोजन को और अधिक उपयोगी बनाने की कोशिश करनी चाहिये।