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पीएम और अमित शाह पर और मुखर हुए शत्रुघ्न सिन्हा, कहा- ‘दो लोगों की सेना’ ने तोड़ दी अर्थव्यवस्था की कमर

नई दिल्ली: बीजेपी से कांग्रेस में शामिल होने पर शत्रुघ्न सिन्हा पीएम मोदी और अमित शाह पर और मुखर हो उठे हैं. बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने गुरुवार को कहा कि ‘‘दो लोगों की सेना” द्वारा थोपी गई नोटबंदी और माल एवं सेवा कर (जीएसटी) ने देश की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी.पूर्व भाजपा नेता सिन्हा कांग्रेस की टिकट पर पटना साहिब सीट से लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. वह यहां मुंबई उत्तर पश्चिम और मुंबई उत्तर से कांग्रेस प्रत्याशी क्रमश: संजय निरुपम एवं उर्मिला मातोंडकर के लिये चुनाव प्रचार कर रहे थे.सिन्हा अपने भाषणों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को ‘‘दो लोगों की सेना” कहा करते हैं.

रैली में सिन्हा ने कहा, ‘‘दो लोगों की सेना द्वारा थोपी गई नोटबंदी और जीएसटी ने देश की अर्थव्यस्था को बहुत प्रभावित किया. बीजेपी छोड़कर कांग्रेस में शामिल हुए शत्रुघ्न सिन्हा ने पिछले साल मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की जीत को लेकर भी हाल में बीजेपी पर निशाना साधा था. सिन्हा ने सवाल किया, “कृपया मुझे बताइए कि पप्पू कौन है और असली फेंकू कौन साबित हुआ है. (हाल में चुनाव वाले) तीन राज्यों में कौन जीता.” गौरतलब है कि भाजपा समर्थक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को अक्सर ‘‘पप्पू” कहकर संबोधित करते हैं,

जबकि कांग्रेस नेता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर झूठे वादे करने का आरोप लगाकर उन्हें अक्सर ‘‘फेंकू” कहते हैं. सिन्हा ने दावा किया कि प्रधानमंत्री मोदी झूठे वादे करने के लिए प्रसिद्ध हैं. उन्होंने कहा कि वह 2022, 2024, 2029 में भी ऐसा करते रहेंगे लेकिन वह इस बार प्रधानमंत्री नहीं बनने वाले. शत्रुघ्न सिन्हा लगातार बीजेपी पर निशाना साधते रहे हैं. इससे पूर्व उन्होंने पीएम मोदी को याद दिलाया था कि कैसे राजधर्म की आंधी के बीच उनकी जाती हुई कुर्सी को आडवाणी ने बचाया था. दरअसल कहा जाता है कि नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में 2002 में गोधरा दंगे के कारण तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजपेयी उन्हें मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहते थे, मगर लालकृष्ण आडवाणी ने उन्हें रोक दिया था.

शत्रुघ्न सिन्हा ने ट्वीट कर कहा था-आज़ादी के 75 साल, 75 क़दम, 75 लक्ष्य, 75 साल के लोगों को ब्रेन डेड नहीं समझते हुए उनके अनुभव/तजुर्बे को शामिल किया होता तो बेहतर नहीं हुआ होता? एक मौक़ा फिर गंवा दिया. यह सही वक़्त होता अगर डॉक्टर मुरली मनोहर जोशी, विद्वान अरुण शौरी और भूतपूर्व वित मंत्री एवं विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा जैसे दिग्गज, जिनका आपकी पार्टी को देश की बड़ी पार्टी बनाने में महत्वपूर्ण योगदान रहा, उनके अनुभव का फायदा लेते….और सरजी को ‘राजधर्म‘ के आंधी के बीच बचाने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान रहा हमारे फ़्रेंड फ़िलॉसफ़र गाइड श्री एल के आडवाणी का। क्यूं सबको अलग थलग कर दिया? शत्रुघ्न सिन्हा ने फिर दूसरे ट्वीट में कहा- बहरहाल, तुम्हारी है, तुम्हीं सम्भालो यह ढकोसला पत्र, असंकल्प पत्र या संकल्प पत्र.फिर मिलेंगे दोस्त. जय हिंद.

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