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चुनाव में करारी हार से बौखलाए प्रत्याशी पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया का अपने ही बड़े नेताओं पर फूटा गुस्सा, कहा- जमीनी हकीकत से बेखबर

नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव में करारी हार से कांग्रेस उबर नहीं पा रही है. अब पार्टी के प्रत्याशियों का गुस्सा अपने ही बड़े नेताओं पर फूट रहा है. मध्य प्रदेश की देवास-शाजापुर से लोकसभा चुनाव में हारने के बाद पद्मश्री प्रहलाद टिपानिया ने अपनी ही पार्टी को कठघरे में खड़ा किया है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस में जातिवादी मानसिकता के लोग बड़े पदों पर बैठे हैं. जो जमीनी कार्यकर्ताओं को न मिलते और न ही उन्हें तवज्जो देते हैं. टिपानिया ने यह भी कहा कि कांग्रेस पार्टी का संगठन कागजों पर ही नजर आता हैय कांग्रेस का संगठन जमीनी हकीकत से बेख़बर है. पार्टी के बड़े नेता ही कांग्रेस में गुटबाजी और हार का बड़ा कारण हैं. कांग्रेस प्रत्याशी ने यह भी कहा कि पार्टी में समर्पित रूप से काम करने वाले कार्यकर्ताओं की कमी है. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को कुल 52 सीटें आई हैं. मध्य प्रदेश में जिस कांग्रेस ने छह महीने पहले विधानसभा चुनाव जीतकर सरकार बनाई थी वह लोकसभा चुनाव में 29 सीटों में मात्र एक ही सीट जीतने में कामयाब हो पाई है. यह सीट सीएम कमलनाथ की छिंदवाड़ा है, जिसमें उनके बेटे नकुलनाथ जीते हैं. कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने यह भी कहा कि कुछ नेता तो केवल अपने बेटों का ही प्रचार करने में लगे रहे. मध्य प्रदेश में कांग्रेस की हालत इतनी खराब हो गई कि अजेय माने जाने वाले ज्योतिरादित्य सिंधिया भी अपनी गुना की सीट नहीं बचा पाए.सबसे ज्यादा चर्चा खुद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अमेठी लोकसभा सीट पर हार की है.

राहुल गांधी की हार के कारणों का पता लगाने वाली कांग्रेस की दो सदस्यीय समिति को बताया गया कि समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का सहयोग नहीं मिलना उनकी हार के लिए जिम्मेदार है. यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली में उनके प्रतिनिधि कांग्रेस सचिव जुबेर खान और के. एल. शर्मा को स्पष्ट तौर पर बताया गया कि सपा और बसपा की अमेठी इकाइयों ने कांग्रेस को सहयोग नहीं किया और उनके एक बड़े वर्ग का वोट भाजपा को चला गया. फिलहाल राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष पद छोड़ने के लिए अड़े हुए हैं. उन्होंने कहा है कि पार्टी नया अध्यक्ष पद ढूंढ़ ले. कांग्रेस संसदीय दल की बैठक में एक बार फिर सोनिया गांधी को नेता चुना गया है. पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने उनके नाम का प्रस्ताव रखा गया है. अब सोनिया गांधी लोकसभा में कांग्रेस के नेता की नियुक्ति करेंगी.

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