
ईरान ने भारत को चाबहार रेल परियोजना से बाहर करते हुए चीन के साथ 400 अरब डॉलर की डील करने की ओर कदम बढ़ाये हैं। ईरान ने कहा है कि करार के 4 वर्ष बीत जाने के बाद भी इंडिया इस प्रोजेक्ट के लिए निधि नहीं दे रहा है, इसलिए ईरान खुद ही चाबहार रेल परियोजना को पूरा करेगा। ईरान की इस घोषणा को भारत के लिए बड़ा कूटनीतिक झटका माना जा रहा है।
सन 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईरान की यात्रा की थी जिस दौरान चाबहार करार पर हस्ताक्षर हुआ था। पूरे प्रोजेक्ट पर करीब 1.6 अरब डॉलर का निवेश होना था। इस प्रोजेक्ट के लिए इरकान के इंजीनियर ईरान गए थे लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से भारत ने रेल परियोजना पर काम को शुरू नहीं किया। अमेरिका ने चाबहार बंदरगाह के लिए राहत दे रखी है लेकिन उपकरणों के आपूर्तिकर्ता नहीं मिल रहे हैं। वैसे भी भारत ने पहले से ही ईरान से तेल का आयात बहुत कम कर दिया है।
यह रेल परियोजना चाबहार पोर्ट से जहेदान के बीच बनाई जानी है। पिछले सप्ताह ईरान के ट्रांसपोर्ट और शहरी विकास मंत्री मोहम्मद इस्लामी ने 628 किमी लंबे रेलवे ट्रैक को बनाने का उद्धाटन किया था। इस रेलवे लाइन को अफगानिस्तान के जरांज सीमा तक बढ़ाया जाना है। द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक इस प्रोजेक्ट को मार्च 2022 तक पूरा किया जाना है।
महाराष्ट्र टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक ईरान के रेलवे ने कहा है हम भारत की मदद के बिना ही इस प्रोजेक्ट को पूरा करेंगे। इसके लिए वह ईरान के राष्ट्रीय विकास निधि से 40 करोड़ डॉलर की धनराशि का उपयोग करेगा। पहले भारत की सरकारी रेल कंपनी इरकान इस प्रोजेक्ट को पूरा करने वाली थी। इस प्रोजेक्ट से भारत के अफगानिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों तक एक वैकल्पिक मार्ग मुहैया कराना जाना था। थी। इसके लिए ईरान, भारत और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय करार हुआ था।
पश्चिम एशिया में अमेरिका के साथ चल विवाद के चलते ईरान और चीन जल्द ही एक बड़ी डील पर समझौता कर सकते हैं। इसके अनुसार चीन ईरान से बेहद सस्ती दरों पर तेल खरीदेगा और इसके बदले में पेइचिंग ईरान में 400 अरब डॉलर का निवेश करने जा रहा है। चीन ईरान की सुरक्षा के लिए घातक आधुनिक हथियार देगा। ईरान और चीन के बीच 25 साल के रणनीतिक समझौते पर बातचीत पूरी हो गई है ऐसा न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में कहा गया है।
भारत ने ईरान के बंदरगाह चाबहार को विकसित करने में अरबों रुपये खर्च किए हैं। अमेरिका के दबाव की वजह से भारत के रिश्ते ईरान के साथ पूर्ववत नहीं हैं। भारत के लिए चाबहार व्यापारिक के साथ-साथ रणनीतिक तौर पर बेहद महत्वपूर्ण है। यह बंदरगाह चीन की मदद से विकसित किए गए पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट से सिर्फ 100 किलोमीटर दूर है। इसलिए भारत के लिहाज से ये काफी महत्वपूर्ण है।