उत्तराखंडः गर्मी बढ़ने के साथ उत्तराखंड के जंगलों में आग का तांडव बढ़ रहा है। बीते 24 घंटों में कुमाऊं और गढ़वाल क्षेत्रों में कुल 112 जगहों में आग ने भयंकर तबाही मचायी। कुमाऊं क्षेत्र में 45 और गढ़वाल में यह आंकड़ा 67 पर पहुंच गया। रानीखेत में भंगचौड़ा के जंगल की आग सैन्य सीमा क्षेत्र की ओर बढ़ने पर सेना के जवानों ने मोर्चा संभाला और आग पर काबू पाया। वन विभाग के अधिकारियों की मानें तो राज्य में अब तक आग की कुल 1420 घटनाओं में 1840.595 हेक्टेयर जंगल को नुकसान पहुंचा है। आग की घटनाओं को काबू पाने को लेकर चलाए गए राहत अभियान के दौरान आठ कर्मी झुलसकर घायल हो चुके हैं। गढ़वाल क्षेत्र में आग से छह वन्यजीवों की मौत हो चुकी है। वन विभाग के आपदा एवं वनाग्नि प्रबंधन के आंकड़ों के मुताबिक कुमाऊं क्षेत्र में अब तक 869 घटनाएं हुई हैं। गढ़वाल क्षेत्र में यह आंकड़ा 487 तक पहुंच गया है। वन्यजीव अभयारण्यों में आग लगने की 64 घटनाएं हो चुकी हैं। वन पंचायतों व सिविल क्षेत्रों में 153 जगहों पर आग लग चुकी है। इस तरह की घटनाओं का आंकड़ा 711 तक पहुंच गया है। वनाग्नि से अब तक 1840.595 हेक्टेयर जंगल स्वाहा हो चुका है। इससे वन विभाग को 3289493 रुपये का नुकसान हो चुका है। मौसम विभाग ने संभावना जतायी है कि 31 मई तक तापमान में और अधिक बढ़ोतरी होगी।
जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ेंगी। ऐसे में वनाधिकारियों, कर्मचारियों को और अधिक सतर्क रहने की जरूरत है। जंगलों को आग से बचाने के लिए वन निदेशालय में अत्याधुनिक नियंत्रण कक्ष स्थापित कर दिया गया है। राज्य में 1437 क्रू स्टेशन की व्यवस्था की गई है। सभी क्रू स्टेशन में सात कर्मचारियों की तैनाती है। इसके अलावा राज्य में 174 वाच टावर स्थापित किए गए हैं। तत्काल जानकारी के लिए प्रभागीय मास्टर कंट्रोल रूम, रेंज कार्यालयों, क्रू स्टेशन और फील्ड स्टाफ को वायरलेस सेट मुहैया कराए गए हैं। इसके अलावा फारेस्ट सर्वे ऑफ इंडिया से एसएमएस द्वारा फायर अलर्ट प्राप्त करने की सुविधा शुरू की गई है। सभी 40 प्रभागीय वनाधिकारियों के मुख्यालयों में मास्टर कंट्रोल रूम की स्थापना की गई है। इसके अलावा संवेदनशील व अतिसंवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित किया गया है।