लखनऊ। अमरीका के जरिए ईरान की सेना’’ सिपाहे पासदाराने इन्किलाब’’ को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी संघठनो की सूची में शामिल किए जाने के फैसले की कड़ी निंदा करते हुए मजलिसे उलमाए हिन्द के जनरल सेक्रेटरी मौलाना सय्यद कल्बे जवाद नकवी ने आज कहा कि अमरीका का फैसला नाइंसाफी और तानाशाही पर आधारित है। मौलाना ने कहा कि अमरीका का ये फैसला अंतरराष्ट्रीय नियमों का उलंघन है जिस पर सयुंक्त राष्ट्र और इंसाफ पसन्द देशों को अमरीका के खिलाफ ठोस कदम उठाना चाहिए क्योंकि पहली बार किसी देश की सेना को आतंकवादी संघठनो की सूची में शामिल किया गया है। सिपाही खासदाराने इन्किलाब अपने देश और सीमाओं की सुरक्षा के लिए लगातार कुर्बानियां देती रही है,
क्या ऐसी सेना को आतंकवादी संघठन कहना सही है? हम अमरीका के इस फैसले की निंदा करते हैं। मौलाना ने कहा कि अमरीका इजराइल और सऊदी अरब की सेना लगातार दूसरे देशों में आतंकवाद को बढ़ावा दे रही हैं और आतंकवादी संघठनो की सरपरस्ती कर रही है , क्या अमरीका अपनी और इजराइल की सेना को भी आतंकवादियों की सूची में शामिल करेगा? मौलाना ने कहा कि अमरीका खुद आतंकवादी है और आतंकवादियों का सरपरस्त है,
इस लिए वो दुसरो को आतंकवादी कह कर अपने आतंकवाद को छुपाने का असफल प्रयास कर रहा है। मौलाना ने कहा कि डोनाल्ड ट्रम्प जब से सत्ता में आये है दिन प्रतिदिन अंतरराष्ट्रीय स्थिति खराब होती जा रही है। ट्रम्प का ये शत्रुतापूर्ण फैसला मध्यपूर्व को अस्थिर कर देगा और उसके परिणाम अच्छे नही होंगे। मौलाना ने कहा कि ट्रम्प का फैसला ईरान पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने की कोशिशों का हिस्सा है लेकिन ट्रम्प को नही मालूम कि ईरान लगातार ऐसे शत्रुतापूर्ण प्रतिबंधों और नाइंसाफी वाले फैसलों के विरुद्ध एक लंबे समय से सफलता के साथ लड़ता चला आ रहा है और इंशाल्लाह आगे भी वो इस्तेमारी ताकतों के विरुद्ध इसी तरह लड़ता रहेगा।